खंडवा: जनता के दबाव के बाद ममलेश्वर लोक प्रोजेक्ट निरस्त, ओंकारेश्वर में जश्न, तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में विरोध रंग लाया, प्रशासन ने ममलेश्वर लोक योजना रद्द की
ओंकारेश्वर में कई दिनों से जारी विरोध के बाद प्रशासन ने ममलेश्वर लोक प्रोजेक्ट को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया।

खंडवा। मुश्ताक मंसूरी। तीर्थनगरी में प्रस्तावित ममलेश्वर लोक प्रोजेक्ट को व्यापक विरोध के चलते प्रशासन ने निरस्त कर दिया। स्थानीय लोगों को संभावित विस्थापन का खतरा था, जिसके कारण आंदोलन तेज हुआ। निर्णय की घोषणा होते ही क्षेत्र में जश्न मनाया गया।
तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में ममलेश्वर लोक प्रोजेक्ट को लेकर कई दिनों से विरोध जारी था। स्थानीय लोगों और संत समुदाय ने परियोजना का तीखा विरोध दर्ज कराया, जिसके बाद प्रशासन ने प्रोजेक्ट निरस्त करने का निर्णय लिया। एसडीएम द्वारा निरस्तीकरण आदेश सौंपते ही क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई और लोगों ने आतिशबाजी कर जश्न मनाया। स्थानीय लोगों का कहना था कि इस प्रोजेक्ट से बड़े पैमाने पर विस्थापन का खतरा उत्पन्न हो रहा था, जो उनके जीवनयापन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता था।
निरस्तीकरण आदेश सौंपा गया
मांधाता विधायक नारायण पटेल, अन्य जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों के बीच खंडवा एडीएम काशीराम बडोले ओंकारेश्वर पहुंचे। खंडवा एसडीएम ने ममलेश्वर लोक निर्माण निरस्त किए जाने का पत्र नारायण पटेल को सौंपा। घोषणा होते ही उपस्थित लोगों ने बाबा ओंकार के जयकारे लगाए। बड़ी संख्या में लोग इस निर्णय का इंतजार कर रहे थे और प्रोजेक्ट रद्द होते ही पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल देखने को मिला।

सर्वे में सामने आया विस्थापन
अपर कलेक्टर काशीराम बडौले ने बताया कि ममलेश्वर लोक के लिए जारी सर्वे में व्यापक विस्थापन की स्थिति सामने आई थी। कई स्थानीय परिवार और कुछ आश्रम प्रभावित होने वाले थे। इससे न केवल निवास प्रभावित होता, बल्कि कई परिवारों की रोज़ी-रोटी पर भी असर पड़ता। लगातार विरोध को देखते हुए प्रोजेक्ट को फिलहाल रोक दिया गया है। आगे किसी भी निर्माण कार्य की शुरुआत संत समाज और स्थानीय लोगों से चर्चा के बाद ही की जाएगी।
संत समाज की नाराज़गी
संत समाज ने अपनी नाराजगी स्पष्ट रूप से व्यक्त की थी। उनका कहना था कि यह निर्माण स्थानीय संस्कृति, परंपरा और साधु-संतों के निवास क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। संत समाज और स्थानीय लोगों ने जनप्रतिनिधियों के साथ चर्चा कर यह विरोध शासन तक पहुंचाया। जनभावनाओं को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने कहा कि भविष्य में किसी भी निर्माण के लिए संत समाज और स्थानीय लोगों की सहमति आवश्यक होगी।
ओंकारेश्वर बंद का प्रभाव
ममलेश्वर लोक प्रोजेक्ट की लागत 120 करोड़ रुपये तय की गई थी और इसे सिंहस्थ 2028 से पहले पूरा किया जाना था। लेकिन परियोजना के विरोध में पिछले दो दिनों से ओंकारेश्वर बंद रहा। इस दौरान दुकानें, टैक्सी और ऑटो सेवाएं पूरी तरह बंद रहीं। श्रद्धालुओं को भोजन-पानी और रात्रि विश्राम की व्यवस्था में कठिनाई का सामना करना पड़ा। कई श्रद्धालुओं को पांच किलोमीटर दूर अधिक किराया देकर ठहरने के लिए मजबूर होना पड़ा। विरोध के दौरान प्रशासन पर आवश्यक व्यवस्थाएं न करने को लेकर सवाल भी उठे।




