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बड़वानी; प्रभु की भक्ति में झूमे श्रद्धालु निकली घट यात्रा,रथ पर सवार होकर निकले सौधर्म इंद्र और अन्य इंद्र परिवार

मुनि श्री प्रणुत सागर जी ससंघ की मंगल आगवानी की ,बड़वानी विधायक राजन मंडलोई ने की आगवानी

 जनोदय पंच। बड़वानी सोमवार 26 जनवरी 2026 का दिन बड़वानी दिगंबर जैन समाज के लिए ऐतिहासिक बन गया, क्योंकि 99 वर्षों के बाद मूल नायक भगवान नेमीनाथ नए रूप में कमलासन पर विराजित होंगे। इस अवसर पर प्रातः गणपुर जिला धार से पद बिहार कर बड़वानी पधारे परम पूज्य गुरुदेव श्रमण मुनिराज प्रणुत सागर ससंघ का मंगल आगमन हुआ। पूरे निमाड़ और दूर-दराज से आए गुरु भक्तों ने राजघाट रोड स्थित सन्मति उद्योग पर मुनि ससंघ की मंगल आगवानी की, जहां आरती उतारकर पाद प्रक्षालन किया गया। करंजे चौराहे पर बैंड-बाजों के साथ सम्पूर्ण दिगंबर-श्वेतांबर जैन समाज ने भव्य स्वागत किया। बड़वानी विधायक राजन मंडलोई ने श्रीफल चढ़ाकर आगवानी की और आशीर्वाद प्राप्त किया। बच्चों और समाजजनों ने मुनि की तीन परिक्रमा कर चरण वंदना की। यह समस्त आयोजन परम पूज्य गुरुदेव आचार्य विशुद्ध सागर के आशीर्वाद से और मुनि प्रणुत सागर के सानिध्य में संपन्न हुआ। करंजे चौराहे से भक्ति और धूमधाम के साथ घट यात्रा निकाली गई, जिसमें सौधर्म इंद्र सहित अन्य इंद्र-इंद्राणी परिवार सहित सुसज्जित रथनुमा बग्गियों में राजा-महाराजा की वेशभूषा में शामिल हुए। कुबेर इंद्र परिवार ने मार्ग में रत्नों की वर्षा की। बांसवाड़ा के नागदा बैंड की भक्ति संगीत लहरियों पर महिला, पुरुष, बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी श्रद्धालु नृत्य करते नजर आए, जिससे पूरा नगर भक्तिमय हो गया।

धार्मिक अनुष्ठान और प्रवचन

घट यात्रा मंदिर पहुंची, जहां लगभग एक घंटे तक श्रद्धालुओं ने भक्ति नृत्य कर गुरुदेव के जयकारे लगाए। मंदिर प्रांगण में बाल ब्रह्मचारी प्रतिष्ठाचार्य चक्रेश भैया के निर्देशन और मंत्रोच्चार के बीच ध्वजारोहण किया गया। आचार्य विराग सागर के चित्र का अनावरण और दीप प्रज्वलन का सौभाग्य चिखलदा के पाटोदी परिवार को मिला। मुनि प्रणुत सागर के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य सौधर्म इंद्र परिवार नवीन कुमार राजमल जैन परिवार को प्राप्त हुआ, वहीं शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य गांधी नगर इंदौर के दोशी परिवार को मिला। धर्मसभा में मुनि ने कहा कि जीवन में किसी को अपना मालिक और गुरु अवश्य बनाना चाहिए, जिससे समस्याओं का समाधान होता है। उन्होंने दृष्टांत देते हुए कहा कि गाय पर संकट आए तो उसका मालिक उसकी रक्षा करता है, जबकि शेर पर विपत्ति आने पर कोई नहीं आता। मुनि ने कहा कि यह सब भगवान की इच्छा से ही संभव हुआ है और समाज का पुण्य प्रबल है। उन्होंने सभी समाजजनों को धर्म कार्यों में निरंतर सक्रिय रहने का आशीर्वाद दिया। पश्चात मुनि ससंघ की आहारचर्या हुई। दोपहर में सह प्रतिष्ठाचार्य चक्रेश भैया के निर्देशन में भोपाल से आए संगीतकार लोकेश जैन एंड पार्टी के भजनों के साथ याग मंडल विधान और वास्तु शांति विधान संपन्न हुआ। शाम को भगवान और मुनि की आरती उल्लास, उमंग और भक्ति भाव के साथ सम्पन्न हुई तथा अन्य धार्मिक संस्कार भी संपन्न कराए गए। उपरोक्त जानकारी मनीष जैन द्वारा प्रदान की गई।

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