सेंधवामुख्य खबरे

सेंधवा: शारीरिक शिक्षा पर राष्ट्रीय सेमिनार, स्वास्थ्य-मानसिकता को बताया विकसित भारत की कुंजी

वीर बलिदानी खाज्या नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित संगोष्ठी में कुलगुरु, अतिरिक्त संचालक और देश के कई विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों ने रखे विचार।

जनोदय पंच। वीर बलिदानी खाज्या नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय सेंधवा में शनिवार को “विकसित भारत @2047 की परिकल्पना में खेल एवं शारीरिक शिक्षा की भूमिका” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित हुई। उद्घाटन सत्र में सरस्वती पूजन व दीप प्रज्वलन हुआ। संगोष्ठी पीएम ऊषा और उच्च शिक्षा विभाग भोपाल द्वारा प्रायोजित रही।

उद्घाटन सत्र की शुरुआत सरस्वती पूजन, दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ की गई। सत्र की अध्यक्षता प्रोफेसर मोहनलाल कोरी, कुलगुरु कांति सूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय खरगोन ने की। मुख्य अतिथि डॉ आर सी दीक्षित, अतिरिक्त संचालक इंदौर संभाग रहे। विशेष अतिथि के रूप में प्रोफेसर दीपक मेहता, स्कूल ऑफ शारीरिक शिक्षा, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर, प्रोफेसर राजीव चौधरी, रविशंकर विश्वविद्यालय रायपुर, प्रोफेसर नीरज सिलावट, गुजरात विद्यापीठ अहमदाबाद तथा डॉ भारत वर्मा, एसोसिएट प्रोफेसर एलएनआईपीई ग्वालियर उपस्थित रहे।

प्राचार्य डॉ जी एस वास्कले का स्वागत भाषण

स्वागत भाषण देते हुए प्राचार्य डॉ जी एस वास्कले ने कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि राष्ट्रीय संगोष्ठी के माध्यम से खेल जगत से जुड़ी बड़ी शख्सियतों से मिलने और सुनने का अवसर मिला। उन्होंने मंचासीन अतिथियों का स्वागत और अभिनंदन किया।


पीएम ऊषा परियोजना का संदर्भ: डॉ महेश बाविस्कर

संगोष्ठी का परिचय देते हुए आइक्यूएसी प्रभारी डॉ महेश बाविस्कर ने बताया कि मध्यप्रदेश के 572 शासकीय महाविद्यालयों में से 27 महाविद्यालयों, जिनमें सेंधवा महाविद्यालय भी शामिल है, को केन्द्र प्रवर्तित प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (पी एम ऊषा) परियोजना कम्पोनेंट-3 के अंतर्गत लाभ मिला है। उन्होंने कहा कि आज इस राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन सॉफ्ट कम्पोनेंट 3 की गतिविधियों के क्रियान्वयन के कारण किया गया है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य कोरे विकास से नहीं, बल्कि टिकाऊ विकास से प्राप्त होगा।

               कार्यक्रम में प्रोफेसर दीपक मेहता का परिचय प्रो इरशाद मंसूरी ने दिया। प्रोफेसर राजीव चौधरी का परिचय डॉ जितेश्वर खरते ने कराया। प्रोफेसर नीरज सिलावट का परिचय प्रो दीपक मरमट ने दिया। वहीं डॉ भारत वर्मा का परिचय डॉ वैशाली मोरे द्वारा प्रस्तुत किया गया।


डॉ आर सी दीक्षित: स्वस्थ मानसिकता से ही लक्ष्य हासिल होगा

अतिथि उद्बोधन में डॉ आर सी दीक्षित ने कहा कि विकसित भारत बनाने के लिए लोगों का स्वस्थ होना जरूरी है और स्वस्थ मानसिकता ही हमें अपने लक्ष्य तक पहुंचाएगी। उन्होंने कहा कि गलतियों को सुधारने की भावना होनी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों और शिक्षकों से सकारात्मक विचार ग्रहण करने का विशेष आग्रह किया।


डॉ दीपक मेहता: हेल्थ सब कुछ है, शारीरिक साक्षरता जरूरी

विशेष अतिथि उद्बोधन में डॉ दीपक मेहता ने कहा कि हेल्थ सब कुछ है, लेकिन इसके बिना कुछ भी हासिल नहीं हो सकता। उन्होंने बताया कि नई शिक्षा नीति 2020 में शारीरिक शिक्षा को अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाया जाना उपलब्धि है। उन्होंने शारीरिक साक्षरता के ज्ञान को बेहद आवश्यक बताया और कहा कि छोटे शहरों में इस विषय पर सेमिनार होने से शारीरिक शिक्षा के महत्व को समझने में मदद मिलती है।


प्रोफेसर मोहनलाल कोरी: खेल को दिनचर्या में अपनाने की अपील

अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रोफेसर मोहनलाल कोरी ने कहा कि विकसित भारत के लिए युवा वर्ग को शारीरिक रूप से स्वस्थ, मानसिक रूप से सुदृढ़ और नैतिक रूप से सजग होना चाहिए, जो खेल के माध्यम से संभव है। उन्होंने कहा कि खेल को केवल गतिविधि न मानकर उसे दिनचर्या में भी अपनाना चाहिए।


तकनीकी सत्र: प्रोफेसर राजीव चौधरी का की-नोट व्याख्यान

प्रथम तकनीकी सत्र के की-नोट स्पीकर प्रोफेसर राजीव चौधरी ने कहा कि खेल और शारीरिक शिक्षा का ज्ञान हमें धर्म की साधना तक पहुंचाते हैं। उन्होंने बताया कि विकसित भारत के लिए आवश्यक तत्व उत्पादकता और सतत विकास शारीरिक शिक्षा से संभव है। उन्होंने कहा कि शारीरिक शिक्षा और खेल से मन, बुद्धि और आत्मा का विकास होता है और आंतरिक क्षमता का निर्माण मन-बुद्धि-आत्मा के सामंजस्य से होता है। उन्होंने खेलों के महत्व को सहभागिता और सहयोग के उदाहरणों के माध्यम से प्रस्तुत किया।


पेनेल डिस्कशन: डॉ भारत वर्मा ने किया संचालन

पेनेल डिस्कशन डॉ भारत वर्मा द्वारा किया गया। इस सत्र में फिट इंडिया, क्राइम रेट कम करने में भूमिका, रोजगार में भूमिका और रसायन का खेल से संबंध जैसे प्रश्नों पर चर्चा की गई। पेनल के प्रश्नों के उत्तर डॉ दीपक मेहता, डॉ नीरज सिलावट, डॉ राजीव चौधरी, डॉ भारत वर्मा एवं डॉ महेश बाविस्कर ने दिए। चर्चा का सार यह बताया गया कि खेल जीवन जीने की कला है और सेमिनार का शीर्षक जन-जन के लिए अनुकरणीय है।


द्वितीय तकनीकी सत्र

द्वितीय तकनीकी सत्र में प्रोफेसर नीरज सिलावट ने खेल के महत्व को गंभीरता से बताया। उन्होंने अपील की कि खेल के गुण अनुशासन को यदि आत्मसात करने का प्रण लेकर लोग लौटते हैं, तो यह सेमिनार के उद्देश्य को सार्थक करने का प्रयास होगा।


पेपर प्रजेंटेशन और संचालन

कार्यक्रम में पेपर प्रजेंटेशन प्रो हिमांशी वर्मा, अमरकंटक विश्वविद्यालय, धर्मेंद्र कुमार सिंह, मंडलेश्वर, डॉ चंदा यादव, बड़वानी तथा दयाराम राजपूत, कसरावद द्वारा किए गए। इसके अलावा ऑनलाइन भी पेपर प्रजेंटेशन पढ़े गए। संचालन डॉ पीयूष शर्मा एवं डॉ जितेश्वर खरते ने किया।

            आभार प्रदर्शन करते हुए आयोजन सचिव डॉ अविनाश वर्मा ने कहा कि सेमिनार के निष्कर्षों को व्यवहारिक रूप में लागू करने का प्रयास जरूर किया जाएगा। यह राष्ट्रीय संगोष्ठी पीएम ऊषा और उच्च शिक्षा विभाग भोपाल, मप्र द्वारा प्रायोजित एवं वीर बलिदानी खाज्या नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय सेंधवा द्वारा आयोजित की गई।


आयोजन समिति और सहभागिता

संगोष्ठी के सह संयोजक डॉ विक्रम जाधव रहे। पी एम ऊषा प्रभारी डॉ दिनेश कनाडे, संयुक्त सचिव प्रो लेफ्टिनेंट संजय चौहान एवं प्रो दीपक मरमट थे। तकनीकी समिति में डॉ मनोज तारे, प्रो शिव बार्चे, प्रो आनंद गावड़ेकर की महत्वपूर्ण सहभागिता रही। राष्ट्रीय सेमिनार में डॉ एच डी वैष्णव पूर्व प्राचार्य, डॉ आई ए बेग पूर्व प्राचार्य, डॉ मीना भावसार पूर्व प्राचार्य, डॉ के आर शर्मा पूर्व प्राध्यापक, डॉ संतोषी अलावा, डॉ यशोदा चौहान, डॉ किशोर सोलंकी, डॉ संतरा चौहान, प्रो बी एस जमरे सहित बाहर से आए अतिथि प्राध्यापक एवं स्टाफ उपस्थित रहे।


Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!