आपकी बात - बारहमासी संवेदनहीनता में कैद सरकारी सिस्टम ने एक और मौत सुनिश्चित की रंजन श्रीवास्तव

आपकी बात
बारहमासी संवेदनहीनता में कैद सरकारी सिस्टम ने एक और मौत सुनिश्चित की
रंजन श्रीवास्तव / भोपाल
ranjansrivastava1@gmail.com
दिल्ली में एक प्राइवेट बैंक में असिस्टेंट मैनेजर 25 वर्षीय कमल ध्यानी 5 फरवरी की देर रात अपने घर वापस जाते हुए नोएडा के 27 वर्षीय युवराज मेहता की ही आश्वस्त थे कि वह जल्दी घर पहुंच जाएंगे. उन्होंने अपने जुड़वां भाई करण ध्यानी को फोन कर बताया था कि वह अगले 10–15 मिनट में घर पहुंचने वाले हैं.
पर युवराज मेहता की ही तरह कमल ध्यानी भी यह भूल गए कि कार्यस्थल और घर के बीच सरकारी सिस्टम की आपराधिक संवेदनहीनता से उत्पन्न कई गड्ढे, नाले, निर्माणाधीन बिल्डिंग्स के बेसमेंट और बिना किसी ढक्कन के मैनहोल भी पाए जाते हैं.
इन मौत के कुओं, जिनके चारों तरफ न कोई चेतावनी का साइनबोर्ड होता है और न कोई रिफ्लेक्टर या बैरिकेड, से बचकर निकलना खासकर रात में काफी स्किल की मांग करता है और अगर इनमें गिरकर बच गए तो वह आपकी किस्मत मानी जाएगी.
कमल ध्यानी अपनी बाइक पर घर वापस जा रहे थे. उन्होंने हेलमेट पहन रखा था, लेकिन उन्हें क्या पता था कि दिल्ली जल बोर्ड द्वारा जनकपुरी इलाके में 15–20 फीट की गहराई तक खोदे गए गड्ढे से उन्हें कोई हेलमेट भी नहीं बचा सकता था.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 5 फरवरी की रात उस इलाके से गुजर रहे एक परिवार ने देखा कि पीड़ित एक गड्ढे में गिर गया है. उन्होंने तुरंत घटनास्थल पर तैनात एक सिक्योरिटी गार्ड को सूचना दी. पुलिस के अनुसार, गार्ड ने उसी रात दिल्ली जल बोर्ड के एक जूनियर कर्मचारी को बताया कि एक शख्स गड्ढे में गिर गया है. इसके बाद जूनियर कर्मचारी ने रात करीब 12:22 बजे सब-कॉन्ट्रैक्टर राजेश प्रजापति को फोन किया और मौके पर आने को कहा. अधिकारियों के मुताबिक प्रजापति मौके पर पहुंचा और उसने वहां एक मोटरसाइकिल और एक व्यक्ति को गड्ढे के अंदर देखा, लेकिन उसने न तो पुलिस को और न ही किसी इमरजेंसी अथॉरिटी को सूचना दी और वापस अपने घर चला गया. बताया जाता है कि उसके कहने पर सिक्योरिटी गार्ड भी वहां से चला गया. पुलिस ने इस मामले में सब-कॉन्ट्रैक्टर और गार्ड को गिरफ्तार कर लिया है. गार्ड को फिरोजाबाद से गिरफ्तार किया गया. गार्ड की गिरफ्तारी को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं और कहा जा रहा है कि गार्ड को गिरफ्तार करके असली अपराधियों से ध्यान हटाने की कोशिश की जा रही है .
यह सच है कि हर नागरिक का कर्तव्य है कि ऐसी परिस्थितियों में घटना देखने के बाद पीड़ित व्यक्ति को बचाने की पूरी कोशिश करे और साथ ही पुलिस या संबंधित एजेंसी को तुरंत सूचना दे. क्योंकि घटना के तुरंत बाद गोल्डन आवर में उचित उपचार मिलने से कई लोगों की जान बचाई जा सकती है. संभव है कि कमल को भी बचाया जा सकता था.
दिल्ली पुलिस ने बीएनएस की धारा 105 के तहत मामला दर्ज किया है. एफआईआर दिल्ली जल बोर्ड के संबंधित अधिकारियों और कॉन्ट्रैक्टर के खिलाफ दर्ज की गई है. दिल्ली जल बोर्ड के तीन अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है.
पर क्या इस कार्रवाई से कमल ध्यानी का जीवन वापस आ जाएगा.
सरकारी सिस्टम में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों की संवेदनहीनता और गैर-जिम्मेदार रवैये की पराकाष्ठा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लगभग 20 दिन पहले ही नोएडा में एक निर्माणाधीन मॉल के गहरे गड्ढे में कार सहित डूब जाने से 27 वर्षीय युवराज मेहता की मौत हो गई थी.
नोएडा भले ही उत्तर प्रदेश में हो, लेकिन नेशनल कैपिटल रीजन में स्थित होने के कारण उसे दिल्ली का ही एक्सटेंशन माना जाता है.
युवराज की मौत भी इसलिए हुई क्योंकि निर्माणाधीन मॉल के लिए खोदे गए गहरे गड्ढे में पानी भरा हुआ था और उसके चारों तरफ न कोई बैरिकेडिंग थी, न कोई रिफ्लेक्टर और न ही कोई मजबूत दीवार जिससे दुर्घटना की आशंका कम की जा सके.
सरकारी सिस्टम की अक्षमता का इससे बड़ा उदाहरण क्या हो सकता है कि युवराज कार से बाहर निकलकर कार की छत पर लगभग दो घंटे तक मदद के लिए चिल्लाता रहा, लेकिन वहां पहुंचे पुलिस और फायर ब्रिगेड के जवान कोहरे और ठंड में उस गड्ढे में उतरने की हिम्मत नहीं दिखा पाए. कार धीरे-धीरे पानी में डूबती रही और युवराज भी उसी के साथ पानी में डूबकर मर गया.
युवराज की मौत के बाद पूरे देश में शोर मचा. सरकारी एजेंसियों की क्षमता पर गंभीर प्रश्न उठाए गए और लगा कि कम से कम दिल्ली और एनसीआर में तो शासन-प्रशासन जाग गया होगा और ऐसी हर जगह सुरक्षा मानकों का पालन होगा, जहां सड़क पर या सड़क के किनारे कोई गड्ढा किसी की जान ले लेगा.
पर कमल ध्यानी की मौत ने उन सभी लोगों को सही साबित कर दिया है, जिनका यह मत है कि एक बीमार और संवेदनहीन व्यवस्था से ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस और प्रभावी इंतजाम की उम्मीद करना व्यर्थ है.
हां, यह जरूर है कि हम कागजों पर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गए हैं.



