मनमाड–धुले–इंदौर रेल परियोजना में किसानों को बढ़ा हुआ मुआवजा मिले; मुद्दा विधानसभा में उठाऊंगा — विधायक राजेश पाडवी

उत्तर महाराष्ट्र के धुले जिले सहित मध्यप्रदेश से सीधा रेल संपर्क स्थापित करने के उद्देश्य से प्रस्तावित मनमाड–धुले–इंदौर रेल मार्ग को अत्यंत महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। इस परियोजना से औद्योगिक, व्यापारिक तथा यात्री परिवहन को बड़ी गति मिलने की उम्मीद है। हालांकि वर्तमान में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में उत्पन्न विभिन्न समस्याओं के कारण परियोजना का कार्य ठप पड़ा हुआ है।
धुले लोकसभा क्षेत्र के कई गांवों के किसानों और नागरिकों द्वारा भूमि अधिग्रहण को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। किसानों का कहना है कि जमीन का मुआवजा तय करते समय वर्तमान बाजार दरों को नजरअंदाज कर पुराने दरों के आधार पर भुगतान निर्धारित किया जा रहा है, जिससे परियोजना प्रभावित किसानों में असंतोष का माहौल है। किसानों ने प्रक्रिया में पारदर्शिता और उचित मुआवजे की मांग की है।
मनमाड–इंदौर रेल संघर्ष समिति के प्रमुख मनोज मराठे ने बताया कि वर्ष 2009 में इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 1500 करोड़ रुपये थी, जबकि अब परियोजना की लागत बढ़कर करीब 18 से 20 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई है और इसके लिए आर्थिक मंजूरी भी मिल चुकी है। यानी परियोजना लागत में लगभग 12 गुना वृद्धि हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि जब अन्य निर्माण सामग्री और संसाधनों के मूल्य 2009 की तुलना में कई गुना बढ़ाए गए हैं, तो किसानों की जमीन का मुआवजा पुराने दरों के आधार पर क्यों दिया जा रहा है, यह सवाल किसान उठा रहे हैं। जमीन भी परियोजना का महत्वपूर्ण संसाधन है, इसलिए उसका मुआवजा भी वर्तमान बाजार मूल्य के अनुसार बढ़ाया जाना चाहिए।
संघर्ष समिति इस मुद्दे को गंभीरता से उठाने वाली है और क्षेत्र के सांसदों के माध्यम से लोकसभा के प्रश्नकाल में भी यह मुद्दा उठाने का प्रयास किया जाएगा, ऐसा मनोज मराठे ने बताया।
इस बीच संघर्ष समिति के प्रमुख मनोज मराठे ने शाहदा विधानसभा क्षेत्र के विधायक राजेश पाडवी से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मनमाड–इंदौर rail मार्ग से प्रभावित महाराष्ट्र के किसानों को अन्य संसाधनों की तरह वर्तमान बाजार मूल्य और महंगाई दर के अनुसार बढ़ा हुआ मुआवजा देने की मांग की गई।
इस अवसर पर विधायक राजेश पाडवी ने कहा,
“मनमाड–इंदौर रेल परियोजना उत्तर महाराष्ट्र के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और परियोजना प्रभावित किसानों को न्याय मिलना जरूरी है। रेल निर्माण में अन्य संसाधनों को जिस तरह वर्तमान दरों के अनुसार मूल्य दिया जाता है, उसी प्रकार किसानों की जमीन को भी संसाधन मानकर उचित और बढ़ा हुआ मुआवजा दिया जाना चाहिए। यह मुद्दा मैं महाराष्ट्र विधानसभा में मजबूती से उठाऊंगा।”
बैठक में भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य डॉ. शशिकांत वाणी, वाण्याविहीर शिक्षा समिति के भाऊसाहेब प्रभाकर उगले सहित अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित थे।
प्रस्तावित मांगों में यह भी शामिल है कि परियोजना का कार्य जारी रखते हुए किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए तथा जिन खेतों से रेल लाइन गुजर रही है वहां किसानों की आवाजाही के लिए वैकल्पिक रास्तों की व्यवस्था की जाए।
मनमाड–धुले–इंदौर रेल मार्ग के बनने से धुले, नंदुरबार, सटाणा, मालेगांव तथा आसपास के क्षेत्रों के लोगों को रेल सुविधा का बड़ा लाभ मिलेगा, साथ ही औद्योगिक और व्यापारिक विकास को भी नई गति मिलेगी। इसलिए नागरिकों द्वारा लगातार मांग की जा रही है कि परियोजना की अड़चनें दूर कर इसका कार्य जल्द से जल्द शुरू किया जाए।



