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सेंधवा: कालीकुंडी में 3.77 करोड़ के पुल का भूमिपूजन, ग्रामीणों को मिलेगी राहत, अतिथियों ने गुणवत्ता और समयसीमा पर दिए निर्देश

कालीकुंडी गांव में कनेर नदी पर बनेगा नया पुल,  जर्जर पुलिया से राहत, ग्रामीणों को मिलेगी बेहतर कनेक्टिविटी

जनोदय पंच | सेंधवा; सेंधवा क्षेत्र के कालीकुंडी गांव में कनेर नदी पर 3.77 करोड़ की लागत से बनने वाले पुल का भूमिपूजन किया गया। 75 मीटर लंबे इस पुल से ग्रामीणों को आवागमन में सुविधा मिलेगी। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों ने समयसीमा और गुणवत्ता पर जोर दिया।

सेंधवा क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार की दिशा में शनिवार को महत्वपूर्ण पहल की गई। वरला तहसील के कालीकुंडी गांव में कनेर नदी पर बनने वाले पुल का भूमिपूजन संपन्न हुआ। इस परियोजना पर लगभग 3 करोड़ 77 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि अजजा आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष अंतरसिंह आर्य, विशेष अतिथि विधायक मोंटू सोलंकी, भाजपा नेता विकास आर्य सहित क्षेत्र के जनप्रतिनिधिगण एवं अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि अजजा आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष अंतरसिंह आर्य ने कहा कि वरला तहसील के ग्राम कालीकुंडी से मटियामेल मार्ग पर मध्य प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत 377.70 लाख की लागत से बनने वाले 76 मीटर लंबे पुल का विधिवत भूमि पूजन किया गया। उन्होंने कहा कि यह निर्माण कार्य क्षेत्रवासियों की वर्षों पुरानी मांग को पूरा करेगा, जिससे विशेषकर वर्षा ऋतु में होने वाली आवागमन की गंभीर समस्याओं का स्थायी समाधान होगा। इस पुल के बन जाने से ग्रामीणों की शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापारिक केंद्रों तक पहुंच न केवल सुगम होगी, बल्कि सुरक्षित भी होगी।

75 मीटर लंबा पुल होगा निर्मित

प्रस्तावित पुल खट्टी-मटियामेल सड़क पर बनाया जाएगा, जिसकी लंबाई लगभग 75 मीटर निर्धारित की गई है। इसका निर्माण मध्य प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण, बड़वानी द्वारा किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में सुधार आएगा और लोगों को बेहतर आवागमन सुविधा मिल सकेगी।

अधिकारियों की देरी पर नाराजगी

कार्यक्रम के दौरान विधायक मोंटू सोलंकी ने अधिकारियों के देर से पहुंचने पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि निर्माण कार्य समय पर और अच्छी गुणवत्ता के साथ पूरा होना चाहिए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।

ग्रामीणों की समस्या का समाधान

ग्रामीण लंबे समय से इस पुल की मांग कर रहे थे। कनेर नदी पर बनी पुरानी पुलिया जर्जर स्थिति में थी, जिससे आवागमन में कठिनाई होती थी। बरसात के मौसम में स्थिति और अधिक खराब हो जाती थी, जिससे किसानों को फसल ले जाने और मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में परेशानी का सामना करना पड़ता था।

अधिकारियों के अनुसार, पुल निर्माण के बाद गांव के लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी। साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार से जुड़ी सेवाओं तक पहुंच भी बेहतर हो सकेगी। इस परियोजना से क्षेत्र के विकास को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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