इंदौर-मनमाड़ नई रेल लाइन पर दिल्ली में उच्चस्तरीय समीक्षा, कार्य तेज करने पर सहमति

जनोदय पंच। नई दिल्ली। मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र को जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित इंदौर-मनमाड़ (वाया सेंधवा) नवीन रेल परियोजना की प्रगति को लेकर दिल्ली में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में अनुसूचित जनजाति आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष अंतरसिंह आर्य ने रेल मंत्रालय (रेलवे बोर्ड) के अध्यक्ष सतीश कुमार एवं वरिष्ठ अधिकारियों के साथ परियोजना की वर्तमान स्थिति और आगामी कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की।
बैठक में अब तक हुए कार्यों, प्रगति की स्थिति तथा परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूर्ण करने के उपायों पर गंभीर मंथन हुआ। इस दौरान आर्य ने बड़वानी जिले के जुलवानिया क्षेत्र में रेल यार्ड निर्माण का विशेष प्रस्ताव रखते हुए परियोजना को शीघ्र पूरा करने के लिए कार्यों को तीन भागों में विभाजित कर समानांतर रूप से शुरू करने का सुझाव दिया। इस पर रेलवे बोर्ड के अधिकारियों ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए कार्यों को तेज गति से पूर्ण करने के लिए सहमति प्रदान की।
आर्य ने कहा कि 306 किलोमीटर लंबी यह इंदौर-मनमाड़ रेल परियोजना आदिवासी एवं पिछड़े क्षेत्रों के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो लंबे समय से लंबित है। इसके पूर्ण होने से निमाड़ अंचल के खंडवा, खरगोन और बड़वानी जिले के लोगों को सीधा रेल संपर्क मिलेगा, जिससे मुंबई तक यात्रा का समय और खर्च दोनों में कमी आएगी।
उन्होंने परियोजना को तीन प्रमुख खंडोंकृमनमाड़ से धूलिया, नरड़ाना से सेंधवा होते हुए, तथा बारुफाटक से महूकृमें विभाजित कर निर्माण कार्य समानांतर रूप से प्रारंभ करने का सुझाव दिया। साथ ही जिन क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण पूर्ण हो चुका है, वहां तत्काल निर्माण कार्य शुरू करने, परियोजना को चरणबद्ध स्वीकृति देने तथा प्रत्येक खंड की लागत का पृथक आकलन तैयार करने की बात भी रखी।
बैठक में जनजातीय हितों को ध्यान में रखते हुए आर्य ने रेलवे स्टेशनों पर ट्रायफेड (ज्त्प्थ्म्क्) के स्टॉल हेतु स्थान उपलब्ध कराने का सुझाव भी दिया, जिससे जनजातीय समाज द्वारा निर्मित उत्पादों को व्यापक बाजार मिल सके और उनकी आय में वृद्धि हो। इस प्रस्ताव का रेलवे बोर्ड अध्यक्ष ने समर्थन करते हुए आवश्यक कार्यवाही का आश्वासन दिया।
आर्य ने जोर देते हुए कहा कि इस रेल परियोजना के पूर्ण होने से आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में रोजगार, व्यापार, शिक्षा एवं सामाजिक विकास के नए अवसर सृजित होंगे। साथ ही रेल यार्ड एवं स्टेशन विकास के माध्यम से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सुनिश्चित किए जा सकते हैं। बैठक के अंत में अधिकारियों ने परियोजना से जुड़े सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र निर्णय लेने का आश्वासन दिया।



