छिंदवाड़ा-बैतूल में 16 बच्चों की मौत, सीएम पहुंचे परासिया — ड्रग कंट्रोलर हटाया, तीन अफसर निलंबित
मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवारों से की मुलाकात, एसआईटी गठित कर जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश

छिंदवाड़ा और बैतूल में जहरीले कफ सिरप से 16 बच्चों की मौत के बाद सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है। मुख्यमंत्री ने पीड़ितों से मुलाकात कर ड्रग कंट्रोलर को हटा दिया और तीन अफसरों को निलंबित किया। साथ ही, पूरे राज्य में दवा फैक्ट्रियों की जांच के आदेश दिए।
मुख्यमंत्री का दौरा और कार्रवाई
छिंदवाड़ा और बैतूल में कोल्ड्रिफ नामक जहरीले कफ सिरप से अब तक 16 बच्चों की मौत हो चुकी है। सोमवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव परासिया पहुंचे, जहां उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने इस दौरान एक बच्चे अदनान के घर पहुंचकर परिजनों से संवेदना व्यक्त की। इसके बाद उन्होंने तत्काल मध्यप्रदेश के ड्रग कंट्रोलर दिनेश मौर्य को हटा दिया। साथ ही, खाद्य एवं औषधि प्रशासन के उपसंचालक शोभित कोष्टा, छिंदवाड़ा के ड्रग इंस्पेक्टर गौरव शर्मा और जबलपुर के ड्रग इंस्पेक्टर शरद जैन को निलंबित करने के निर्देश दिए।
डॉक्टरों पर एफआईआर और जांच के आदेश
सरकार ने इस पूरे मामले की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित की है। इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने प्रतिबंधित सिरप या ड्रग्स लिखने वाले डॉक्टरों पर एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिम्मेदार चाहे कोई भी हो, किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने बताया कि तमिलनाडु की जिस फैक्ट्री से यह सिरप बना था, वहां की प्रक्रिया अमानक पाई गई है। वहां की सरकार ने भी कंपनी पर कठोर कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।
फैक्ट्रियों की जांच और पीड़ितों की मदद
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की सभी दवा फैक्ट्रियों की प्रॉपर और रैंडम जांच कराई जाएगी, चाहे वे किसी भी राज्य की हों। उन्होंने कहा, “यह दुख की घड़ी है, सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है। बीमार बच्चों का इलाज सरकार करवाएगी और जो भी प्रबंधन जरूरी होगा, वह किया जाएगा।”
स्थानीय मेडिकल स्टोर पर कार्रवाई
परासिया में बच्चों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए मेसर्स अपना मेडिकल स्टोर्स का ड्रग लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया। यह कार्रवाई औषधि एवं प्रसाधन सामग्री नियमावली 1945 के नियम 66 (1) के तहत की गई। औषधि निरीक्षक दल को 3 अक्टूबर 2025 को प्रतिष्ठान में गंभीर अनियमितताएं मिली थीं। संचालिका ज्योति सोनी को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन जवाब न मिलने पर लाइसेंस रद्द कर दिया गया और दुकान में दवाओं की बिक्री पर रोक लगा दी गई।



