कुण्डिया-मेंदल्यापानी-वरला मार्ग के निर्माण हेतु सांकेतिक धरने में अधूरे 4 किमी सड़क निर्माण को लेकर संघर्ष समिति का विरोध
अधूरे 4 किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य की स्वीकृति नहीं मिलने से ग्रामीणों ने तहसील कार्यालय के सामने प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया।

सेंधवा। कुण्डिया-मेंदल्यापानी-वरला मार्ग के अधूरे 4 किलोमीटर हिस्से के निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने एक दिवसीय सांकेतिक धरना दिया। वर्षों से लंबित इस कार्य के कारण आवागमन बाधित है और क्षेत्र के अनेक गांवों के नागरिकों को लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।
कुण्डिया-मेंदल्यापानी-वरला मार्ग के शेष 4 किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। क्षेत्र के विकास और आवागमन की सुविधा हेतु इस मार्ग का पूरा होना आवश्यक माना जाता है। दिनांक 30 अक्टूबर 2025 को संघर्ष समिति द्वारा इस विषय में ज्ञापन कलेक्टर, जिला बड़वानी को तहसीलदार, वरला के माध्यम से सौंपा गया था। संतोषजनक प्रगति न होने पर आज प्रभावित गांवों के नागरिकों ने तहसील कार्यालय के सामने एक दिवसीय सांकेतिक धरना दिया।
15 वर्ष से संघर्ष जारी है
करीब 15 वर्ष पहले “जन संघर्ष समिति, वरला” के नेतृत्व में वरला से सेंधवा तक पदयात्रा कर मुख्यमंत्री एवं जिलाधीश को ज्ञापन सौंपा गया था। इसके अलावा तीन बार मुख्यमंत्री तथा एक बार प्रधानमंत्री के नाम भी ज्ञापन प्रस्तुत किए जा चुके हैं। वर्तमान में सोलवन फाटे से कुण्डिया और मेंदल्यापानी से वरला तक सड़क प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना अंतर्गत पूर्ण हो चुकी है, किंतु कुण्डिया से मेंदल्यापानी तक का लगभग 4 किलोमीटर हिस्सा अब भी अधूरा है।

ग्रामीणों की समस्याएँ और बढ़ती दूरी
अपूर्ण सड़क के कारण लगभग 10 से 12 आदिवासी गांवों के करीब 40 हजार नागरिक प्रभावित हैं। सोलवन, अंबापानी, मालवन, कुण्डिया और आसरापानी के निवासियों को वरला पहुंचने के लिए 25 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। वहीं खुटवाड़ी, पेंढारन्या, बाखरली, खारिया, मेंदल्यापानी, बढ़ियापानी और हेलगापानी के नागरिकों को सेंधवा जाने के लिए 40 से 50 किलोमीटर अधिक मार्ग तय करना पड़ता है, जिससे समय, धन और आपात सेवाओं पर प्रभाव पड़ता है।

स्वीकृति नहीं तो वरला से सेंधवा तक पैदल यात्रा
समिति ने कहा कि मार्ग सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक उन्नति का आधार है, इसलिए निर्माण में और विलंब स्वीकार्य नहीं। यदि 20 दिनों में स्वीकृति प्रक्रिया प्रारंभ नहीं हुई तो वरला से सेंधवा तक पैदल यात्रा कर एसडीएम कार्यालय पर धरना दिया जाएगा। इस धरने में ओमप्रकाश पाण्डेय, पोरलाल खर्ते, गुच्छा जमरा, प्रदीप चौरसिया, कवरलाल जैन, रुपेश जैन, शांतिलाल आर्य, सईद कुरैशी, भुवान सिंह जाधव, दूर सिंह पटेल, राकेश रावत, शांताराम खर्ते, सायसिंह ब्राह्मणे, सुरेश पटेल, नीलेश पटेल, सीताराम बर्डे, परसराम सेनानी, महेंद्र सेनानी, साई किराड़े, राजेंद्र निंगवाल, भगवान मांगु, तारा सिंह खर्ते, इदरिस सामरे, दगडू ठाकरे, विट्ठल पाटील एवं अन्य सदस्य उपस्थित थे।



