हर्ष उल्लास और उत्साह के बीच स्वर्ण छटा युक्त नवीन कमलासन पर विराजे भगवान नेमीनाथ
नवीन कमलासन पर भगवान नेमीनाथ की भव्य विराजना, श्रद्धालुओं में भावनात्मक उल्लास

बड़वानी। जनोदय पंच बड़े ही हर्ष, उल्लास और उत्साह के बीच स्वर्ण छटा युक्त नवीन कमलासन पर विराजे भगवान नेमीनाथ का ऐतिहासिक लघु पंच कल्याणक दिगंबर जैन मंदिर बड़वानी में संपन्न हुआ। वेदी प्रतिष्ठा और जिन बिंब प्रतिष्ठा कार्यक्रम के दूसरे दिन अल सुबह भगवान का लघु पंच कल्याणक किया गया, जिसमें भगवान के माता-पिता बनने का सौभाग्य रेणुबाला महेंद्र पहाड़िया को प्राप्त हुआ। भगवान के गर्भ में आते ही कुबेर इंद्र ने रत्नों की वर्षा की और भगवान के जन्म पर सौधर्म इंद्र, शची इंद्राणी भक्ति पूर्वक नृत्य करने लगे। साथ ही समस्त इंद्र-इंद्राणियों ने नृत्य किया। भगवान के जन्म होते ही पूरे स्वर्ग लोक में ढोल, मंजीरे और दुंदुभी बजने लगे।
वैराग्य और दीक्षा का प्रसंग
राजकुमार नेम कुमार के विवाह की तैयारी के दौरान पशुओं के क्रंदन की आवाज सुनाई दी। ज्ञात हुआ कि इन पशुओं का वध कर उनका भोजन परोसा जाएगा। यह जानकर तत्काल उन्हें वैराग्य हो गया और उन्होंने दीक्षा लेकर मुनि जीवन स्वीकार किया। मुनि दीक्षा कल्याणक पर अंजलि पारस पहाड़िया ने नेमीनाथ महामुनिराज को पीछीं और कमंडल प्रदान किए। मुनि प्रणुत सागर ने दीक्षा और केवल ज्ञान के संस्कार संपन्न कराए। भगवान के मोक्ष गमन पर उनका शरीर कपूर की भांति विलीन हो गया और केवल नाखून तथा केश शेष रहे, जिनका अग्नि संस्कार अग्नि कुमार देव द्वारा किया गया। अग्नि कुमार देव बनने का सौभाग्य मनीष जैन को प्राप्त हुआ।

नवीन वेदी पर विराजना
भगवान की मुख्य वेदी और कमलासन का उद्घाटन नरेंद्र कुमार, हितेश, गौरव काला परिवार द्वारा किया गया। भगवान नेमीनाथ से निवेदन कर उन्हें नवीन कमलासन पर पूरे परिकर सहित विराजित होने का निमंत्रण दिया गया। जैसे ही मुनि प्रणुत सागर के सानिध्य में पहाड़िया परिवार ने भगवान को नई वेदी पर विराजित किया, पूरे मंदिर परिसर में जयकारों की गूंज के साथ भक्ति, संगीत, उल्लास और हर्ष का वातावरण बन गया। भक्तों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े और प्रभु की एक झलक पाने की होड़ लग गई।

प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा और पुण्यार्जक
भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा को विराजित करने का सौभाग्य महेंद्र टॉकीज वोहरा परिवार, इंदौर, बड़वानी को प्राप्त हुआ। दूसरे पार्श्वनाथ भगवान को विराजमान करने का सौभाग्य धर्मेंद्र जी रमेश चंद जी गोधा परिवार को मिला। अन्य भगवान की प्रतिमाओं को विराजित करने का सौभाग्य समाज के अन्य श्रेष्ठी श्रावकों को प्राप्त हुआ। नेमीनाथ भगवान के शिखर पर कलश के पुण्यार्जक दीपचंद रतन लाल पहाड़िया बने, जबकि पार्श्वनाथ के दोनों शिखर कलश के पुण्यार्जक धर्मेंद्र रमेश चंद गोधा परिवार रहे। छत्र चढ़ाने का सौभाग्य पदम कुमार प्रकाश चंद काला को और चंवर लगाने का सौभाग्य माला मुकेश जैन को मिला।
ध्वजा, दीपक और अन्य धार्मिक दायित्व
मंदिर के तीनों शिखरों पर ध्वजा फहराने का सौभाग्य चंदा देवी अशोक जी झांझरी, भिकनगांव को प्राप्त हुआ। अखंड दीपक का सौभाग्य सौरभ चंदन जैन परिवार को मिला। आचार्य विद्यासागर और आचार्य विरागसागर की चरण छत्री एक साथ बनाने की स्वीकृति मीना, राजेंद्र कुमार बोहरा और डॉक्टर निलेश जैन ने प्रदान की। सभी कार्यक्रम पंडित नितिन झांझरी, प्रतिष्ठाचार्य, और ब्रह्मचारी चक्रेश भैया, सहायक प्रतिष्ठाचार्य, के निर्देशन में संपन्न हुए।

आशीर्वाद, सम्मान और विदाई
मुनि प्रणुत सागर ने सभी को धर्म, भगवान और साधु-संतों के प्रति समर्पित रहने का संदेश देते हुए एकजुट होकर धार्मिक कार्यों में सहभागिता के लिए प्रेरित किया। संयोजकों ने सभी मुख्य पात्रों और दानदाताओं का शॉल, श्रीफल, माला और अंग वस्त्र से सम्मान किया तथा धन्यवाद ज्ञापित किया। समाज श्रेष्ठियों द्वारा संयोजक दीपक गंगवाल, आर.के. जैन, नवीन जैन, राजेश गोधा, देवेंद्र गोधा का भी सम्मान किया गया और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। इन सभी के सामूहिक प्रयास से मात्र 15 दिनों में इतना विशाल कार्यक्रम संपन्न हुआ।
श्रद्धालुओं की सहभागिता
इस अवसर पर संपूर्ण निमाड़-मालवा क्षेत्र से श्रावक-श्राविकाओं ने उपस्थित होकर धर्म लाभ लिया और मुनि प्रणुत सागर को श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। दोपहर में मुनि प्रणुत सागर का बिहार कुक्षी तालनपुर के लिए हुआ। समाजजनों ने सजल नेत्रों से भावभीनी विदाई दी और पुनः बड़वानी पधारने का निवेदन किया। उपरोक्त जानकारी मनीष जैन द्वारा प्रदान की गई।




