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सेन्धवा में रेलवे यार्ड की मांग तेज, नगरपालिका अध्यक्ष को सौंपा गया ज्ञापन, मनमाड़–इंदौर रेलवे संघर्ष समिति सक्रिय, विकास के लिए अनुशंसा की मांग

संघर्ष समिति प्रमुख मनोज मराठे ने बसंती बाई यादव को ज्ञापन सौंपकर शीघ्र प्रस्ताव पारित करने का किया अनुरोध

  • मनमाड़–इंदौर रेलवे संघर्ष समिति ने सेन्धवा में रेलवे यार्ड की मांग तेज की।

  • प्रमुख मनोज मराठे ने नगरपालिका अध्यक्ष बसंती बाई यादव को ज्ञापन सौंपा।

  • कृषि, व्यापार, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं में लाभ का दावा।

  • रेलवे यार्ड स्वीकृति की प्रक्रिया भी सार्वजनिक की गई।

  • कलेक्टर बड़वानी, SDM सेन्धवा, रेलवे बोर्ड, रेल मंत्रालय, सांसद एवं विधायक को ज्ञापन भेजने की तैयारी।


जनोदय पंच। सेन्धवा में नवीन रेलवे मार्ग पर रेलवे यार्ड स्वीकृति की मांग को लेकर मनमाड़–इंदौर रेलवे संघर्ष समिति ने अभियान तेज किया है। प्रमुख मनोज मराठे ने नगरपालिका अध्यक्ष बसंती बाई यादव को ज्ञापन सौंपकर परिषद से औपचारिक अनुशंसा करने का अनुरोध किया है।

मध्यप्रदेश–महाराष्ट्र सीमा पर स्थित सेन्धवा को महत्वपूर्ण कृषि एवं व्यापारिक केंद्र बताते हुए मनोज मराठे ने कहा कि यहां रेलवे यार्ड की स्थापना सम्पूर्ण निमाड़ क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर सिद्ध होगी। उन्होंने नगरपालिका परिषद से प्रस्ताव पारित कर शासन एवं रेलवे विभाग को भेजने का अनुरोध किया।


 कृषि क्षेत्र को संभावित लाभ

संघर्ष समिति के अनुसार राजपुर–बेडिया कृषि मंडी से प्रतिवर्ष सूखी मिर्च, सब्ज़ियाँ एवं अन्य कृषि उत्पाद महाराष्ट्र और दक्षिण भारत की मंडियों में भेजे जाते हैं। खरगोन और बड़वानी जिलों से गेहूं एवं सोयाबीन का परिवहन वर्तमान में सड़क मार्ग से किया जा रहा है। समिति का कहना है कि रेलवे यार्ड स्थापित होने पर गेहूं, सोयाबीन, सूखी मिर्च और सब्ज़ियों का रेल मार्ग से सीधा निर्यात संभव होगा, परिवहन लागत में कमी आएगी तथा सड़क यातायात का दबाव घटेगा।


व्यापार, उद्योग और रोजगार पर प्रभाव

समिति के अनुसार रेलवे यार्ड बनने से माल ढुलाई सस्ती और तेज होगी तथा राष्ट्रीय बाजारों से सीधा संपर्क स्थापित होगा। गोदाम, कोल्ड स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट व्यवसाय को बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय युवाओं को लोडिंग-अनलोडिंग, परिवहन सेवाएं, सुरक्षा, तकनीकी सेवाएं, सफाई एवं सहायक कार्यों में रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। ढाबे, होटल, किराना और मरम्मत केंद्र जैसे व्यवसायों के विस्तार की संभावना भी जताई गई।


 आधारभूत सुविधाएं और राजस्व लाभ

संघर्ष समिति ने कहा कि रेलवे यार्ड से सड़क, बिजली, पानी, इंटरनेट एवं संचार सुविधाओं का विस्तार होगा। भूमि एवं संपत्तियों के मूल्य में वृद्धि तथा स्थानीय आय स्रोतों में बढ़ोतरी की संभावना है। समिति का यह भी कहना है कि माल परिवहन बढ़ने से भारतीय रेलवे को स्थायी राजस्व लाभ मिलेगा और सेन्धवा एक महत्वपूर्ण माल परिवहन केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है।


स्वीकृति प्रक्रिया और आगे की रणनीति

मनोज मराठे ने बताया कि रेलवे यार्ड स्वीकृति के लिए जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय निकायों की अनुशंसा, रेलवे विभाग द्वारा सर्वे एवं व्यवहार्यता अध्ययन, भूमि उपलब्धता, लागत निर्धारण, रेलवे बोर्ड एवं रेल मंत्रालय से अंतिम स्वीकृति जैसी प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं। उन्होंने कहा—

“सेन्धवा में रेलवे यार्ड की स्थापना केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि सम्पूर्ण निमाड़ क्षेत्र के सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान की आधारशिला है। यह किसानों, व्यापारियों, युवाओं एवं आम नागरिकों के उज्ज्वल भविष्य से जुड़ा विषय है।”

उन्होंने बताया कि इस मांग को लेकर कलेक्टर बड़वानी, SDM सेन्धवा, रेलवे बोर्ड, रेल मंत्रालय, सांसद एवं विधायक को भी ज्ञापन प्रेषित किया जाएगा। मनमाड़–इंदौर रेलवे संघर्ष समिति ने जनहित में अभियान जारी रखने की बात कही है।

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