सेंधवा; बाकानेर घाट मार्ग पर हाईकोर्ट का निर्देश, सड़क रखरखाव हो नियमानुसार
राष्ट्रीय राजमार्ग-3 के वैकल्पिक मार्ग को लेकर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट इंदौर खंडपीठ का फैसला

इंदौर से मुम्बई जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-3 पर बाकानेर घाट वैकल्पिक मार्ग को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट इंदौर खंडपीठ ने सुनवाई की। न्यायालय ने याचिका का निराकरण करते हुए निर्देश दिए कि सड़क का रखरखाव नियमानुसार हो और पुनः खराब होने पर याचिका दोबारा दायर की जा सके।
सड़क निर्माण पर उठे सवाल
इंदौर से मुम्बई जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-3 पर दुर्घटनाओं को देखते हुए बाकानेर घाट साइड से वैकल्पिक मार्ग का निर्माण 106 करोड़ रुपये की लागत से 8.8 किलोमीटर लंबाई में किया गया था। हालांकि निर्माण के मात्र छह माह बाद ही यह सड़क गड्ढों में तब्दील हो गई, जिसके चलते मामला उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ तक पहुंचा।
हाईकोर्ट में जनहित याचिका की सुनवाई
सेंधवा के सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता बी.एल. जैन द्वारा प्रस्तुत जनहित याचिका की सुनवाई न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला एवं न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ में हुई। केन्द्र शासन की ओर से सिनीयर एडवाकेट एन.व्ही. कीनी ने न्यायालय में लिखित स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि उक्त सड़क पांच वर्ष की गारंटी पर ठेकेदार द्वारा बनाई गई है और खराब हिस्सों की मरम्मत करवाई जा चुकी है।
याचिकाकर्ता की आपत्ति और निर्देश
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अभिषेक तुगनावत ने न्यायालय को बताया कि गणेश घाट क्षेत्र में पूर्व में हुई दुर्घटनाओं में 450 से अधिक लोगों की मृत्यु के बाद यह वैकल्पिक मार्ग बनाया गया था, लेकिन छह माह में ही सड़क खराब हो गई। वर्तमान मरम्मत के बावजूद राइडिंग सरफेस ठीक नहीं है और वाहन चालकों को प्रति किलोमीटर टोल चुकाने के बाद भी व्यवस्थित सड़क नहीं मिल पा रही। इस पर न्यायालय ने केन्द्र सरकार को सड़क का रखरखाव नियमानुसार करने के निर्देश दिए और याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता दी कि सड़क दोबारा खराब होने पर पुनः याचिका दाखिल की जा सके। इसके साथ ही याचिका का निराकरण कर दिया गया।



