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बड़वानी; भगवान बिरसा मुंडा शासकीय महाविद्यालय पाटी में राष्ट्रीय गणित दिवस पर संगोष्ठी का आयोजन

सेकंड से ब्रह्मांड तक रामानुजन का गणितीय अंतर्दृष्टि का अद्भुत संसार

बड़वानी; उच्च शिक्षा विभाग मध्य प्रदेश के निर्देशानुसार भगवान बिरसा मुंडा शासकीय महाविद्यालय पाटी में राष्ट्रीय गणित दिवस का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ एवं प्लेसमेंट सेल के माध्यम से महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. परवेज मोहम्मद के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।

इस अवसर पर गणित के क्षेत्र में भारतीय ज्ञान परंपरा का अवदान विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। साथ ही वैदिक गणित विषय पर निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्राचीन प्रमुख भारतीय गणितज्ञों के छायाचित्र एवं उनकी प्रमुख खोजों को पीपीटी प्रेजेंटेशन के माध्यम से दिखाया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. मंशाराम बघेल ने श्रीनिवास रामानुजन के जीवन एवं गणितीय योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि रामानुजन का जन्म तत्कालीन मद्रास प्रांत में हुआ और उन्होंने स्व-अध्ययन के माध्यम से गणित में असाधारण दक्षता प्राप्त की। वर्ष 1913 में उन्होंने अपने प्रमेय पत्रों के माध्यम से कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के प्रसिद्ध गणितज्ञ प्रो हार्डी का ध्यान आकर्षित किया। हार्डी के आमंत्रण पर रामानुजन 1914 में इंग्लैंड गए, जहाँ दोनों के बीच गणित के इतिहास की एक अद्वितीय बौद्धिक साझेदारी विकसित हुई। सांस्कृतिक और वैचारिक भिन्नताओं के बावजूद, गणित के प्रति साझा प्रेम ने उन्हें एक सूत्र में बाँधे रखा।


प्राचार्य डॉ. परवेज मोहम्मद ने अपने उद्बोधन में कहा कि घड़ी के एक सेकंड से लेकर अनंत ब्रह्मांड की खगोलीय घटनाओं तक, हर जगह गणित की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने श्रीनिवास रामानुजन को भारतीय ज्ञान परंपरा की महान विभूति बताते हुए उनके योगदान को रेखांकित किया जिसमें अनेक गणितीय सूत्र और लगभग 3900 से अधिक महत्वपूर्ण प्रमेय शामिल है। कार्यक्रम का संचालन करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ एवं प्लेसमेंट प्रभारी प्रो. दिनेश ब्राम्हणे ने प्राचीन भारतीय गणितज्ञों – आर्यभट्ट, वराहमिहिर, ब्रह्मगुप्त, भास्कर प्रथम, महावीर, भास्कर द्वितीय (भास्कराचार्य) और माधवाचार्य के योगदान को बताते हुवे कहा कि शून्य की अवधारणा, दशमलव प्रणाली, बीजगणित, त्रिकोणमिति तथा पाई (π) के सटीक मान जैसी खोजों के कारण भारत को गणित का स्वर्ण युग प्राप्त हुआ, जिसकी गूंज आज भी विश्वभर में सुनाई देती है।
कार्यक्रम में महाविद्यालय की प्रो. जया न्यावत ,ग्रंथपाल डॉ. भारत सिंह चौहान, क्रीड़ा अधिकारी डॉ. अंजूबाला जाधव, जगदीश, कनसिंह, शिवजी सखाराम, विक्रम सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय गणित दिवस के महत्व को आत्मसात करने और भारतीय ज्ञान परंपरा पर गर्व करने के संकल्प के साथ हुआ।

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