सेंधवा; बिजासन घाट की दुर्घटनाओं पर राज्यसभा में राज्यसभा सांसद डॉ सुमेर सिंह सोलंकी ने सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग की

सेंधवा-बड़वानी। रमन बोरखड़े। राज्यसभा सांसद डॉ सुमेर सिंह सोलंकी ने आज राज्यसभा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दे को उठाते हुए मध्य प्रदेश के निमाड़ क्षेत्र में स्थित मध्य प्रदेश–महाराष्ट्र सीमा के बिजासन घाट पर लगातार हो रही भीषण सड़क दुर्घटनाओं पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने सदन में कहा कि वे मध्य प्रदेश के निमाड़ क्षेत्र से आते हैं, जहां विंध्याचल और सतपुड़ा की पहाड़ियों के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 3 पर स्थित बिजासन घाट लंबे समय से हादसों का केंद्र बना हुआ है। यहां लगातार गंभीर दुर्घटनाएं हो रही हैं। कई बार एक ही स्थान पर 90 से अधिक दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं और सैकड़ों नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।
डॉ सोलंकी ने कहा कि जब किसी निश्चित स्थान पर बार-बार दुर्घटनाएं हो रही हों, तो यह तकनीकी खामियों का स्पष्ट संकेत होता है। इस घाट पर कई बार 24-24 घंटे तक जाम की स्थिति बनी रहती है, जिससे आम जनता, परिवहन व्यवस्था और आपातकालीन सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित होती हैं। उन्होंने सदन के माध्यम से देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदीऔर राष्ट्रीय परिवहन मंत्री श्री नितिन गडकरी से आग्रह किया कि बिजासन घाट पर दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए एक नई सुरक्षित सड़क का निर्माण शीघ्र कराया जाए, ताकि जनहानि को रोका जा सके।
डॉ सोलंकी ने बताया कि इससे पूर्व इसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित गणेश घाट पर लगातार हो रही दुर्घटनाओं का मुद्दा भी उन्होंने राज्यसभा में उठाया था। उस पर त्वरित संज्ञान लेते हुए सरकार द्वारा 107 करोड़ रुपये की लागत से नई सड़क का निर्माण कराया गया। नई सड़क बने लगभग एक वर्ष हो चुका है और अब तक वहां एक भी दुर्घटना नहीं हुई है, जबकि पहले वहां सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी थी। यह इस बात का प्रमाण है कि सही तकनीकी समाधान और मजबूत इच्छाशक्ति से दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है।
उन्होंने भावुक शब्दों में कहा कि सड़क हादसों में कई माताओं ने अपने बेटे खोए हैं, कई बहनों ने अपने भाइयों को और कई बच्चों ने अपने माता-पिता को खो दिया है। इस अपार पीड़ा को देखते हुए बिजासन घाट पर तत्काल ठोस कदम उठाया जाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। डॉ सोलंकी ने सरकार से मांग की कि बिजासन घाट की तकनीकी खामियों को दूर कर, वहां वैकल्पिक सुरक्षित मार्ग का निर्माण कर दुर्घटनाओं पर स्थायी रूप से अंकुश लगाया जाए।



