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राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी ने घरेलू सर्वेक्षणों में डिजिटल समावेश और डेटा विश्वसनीयता का विषय राज्यसभा में उठाया

बड़वानी। रमन बोरखड़े। राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी ने संसद के शीतकालीन सत्र में अतारांकित प्रश्न के माध्यम से देश में किए जा रहे और आगामी घरेलू सर्वेक्षणों से जुड़े अहम विषयों को राज्यसभा में उठाया। यह प्रश्न सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय से संबंधित था, जिसमें डिजिटल प्रश्नावलियों पर बढ़ती निर्भरता, संभावित डिजिटल अपवर्जन, उपभोग व्यय आंकड़ों की समयबद्ध उपलब्धता, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभाव तथा आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर तथ्यात्मक स्थिति जानने का प्रयास किया गया ।

डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी ने अतारांकित प्रश्न के माध्यम से यह विषय सामने रखा कि डिजिटल माध्यमों के विस्तार के बीच यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि ग्रामीण, जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों की आबादी किसी भी प्रकार से घरेलू सर्वेक्षणों से बाहर न रहे। साथ ही उन्होंने अद्यतन गरीबी और उपभोग के आकलन के लिए उपभोग व्यय सर्वेक्षण के आंकड़ों को शीघ्र संसाधित कर सार्वजनिक किए जाने की आवश्यकता पर भी सरकार का ध्यान आकर्षित किया।

इस पर सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), योजना मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं संस्कृति मंत्रालय के राज्य मंत्री श्री राव इंद्रजीत सिंह ने सरकार का पक्ष रखते हुए यह व्यक्त किया कि मंत्रालय द्वारा किए जाने वाले सभी घरेलू सर्वेक्षण वैज्ञानिक और संभाव्यता आधारित सैंपलिंग पद्धतियों पर आधारित होते हैं। इन सर्वेक्षणों में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया जाता है, जिससे निष्पक्ष कवरेज और व्यापक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके।

उपभोग व्यय से जुड़े आंकड़ों के संदर्भ में यह बताया गया कि हाल के वर्षों में लगातार घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण किए गए हैं और उनके निष्कर्ष निर्धारित समय-सीमा में सार्वजनिक किए गए हैं। इससे गरीबी आकलन, उपभोग प्रवृत्तियों के अध्ययन और सामाजिक-आर्थिक नीतियों के निर्माण के लिए विश्वसनीय आधार उपलब्ध हुआ है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभाव को समझने के उद्देश्य से शिक्षा मंत्रालय के साथ समन्वय करते हुए शिक्षा पर एक व्यापक मॉड्यूलर सर्वे किया गया। इस सर्वे के माध्यम से स्कूली शिक्षा पर परिवारों के व्यय, निजी कोचिंग और ट्यूशन पर होने वाले खर्च का आकलन किया गया, जिससे ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा से जुड़े वास्तविक परिदृश्य को समझने में सहायता मिली है।

सर्वेक्षणों की सटीकता बढ़ाने और शहरीकरण की प्रक्रिया से गुजर रहे क्षेत्रों में जनसंख्या घनत्व के बेहतर आकलन के लिए आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर भी सरकार द्वारा विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जीआईएस मैपिंग, उपग्रह आंकड़ों और जियो-आईसीटी आधारित समाधानों के माध्यम से शहरी ढांचे से जुड़े सर्वेक्षणों को सुदृढ़ किया जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार डेटा आधारित, समावेशी और तकनीक-सक्षम नीति निर्माण की दिशा में लगातार कार्य कर रही है, ताकि डिजिटल युग में भी देश का कोई नागरिक विकास प्रक्रिया से पीछे न छूटे।

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