धर्म व्यक्ति को भटकने नही देता है – योग गुरू सोनी

बड़वानी। धर्म का अर्थ होता है, धारण करना।जो दूसरों को मार्गदर्शन करें उसके जीवन को सुखी और स्वस्थ बनाये उसे धर्म कहते हैं। संसार कोई भी धर्म हिंसा, धोखा, और दूसरों को दुःख देना नही सिखाता है,वह संसार में शांति चाहता है। इसके विपरित जो व्यक्ति ऐसा आचरण करता है,ऐसे
व्यक्ति से हमेशा सावधान और सर्तक रहे क्योंकि वह अपने स्वार्थ के लिए किसी का भी अहित कर उसे रोगी बना सकता हैं।जो दूसरों का हमेशा अहित चाहता ऐसा व्यक्ति जीवन भर संतुष्ट नही रह सकता ,ऐसा व्यक्ति मानसिक तनाव के कारण मानसिक रोगी बनकर स्वयं को और दूसरों को भी मुश्किल में डाल देता है। उक्त बातें योग गुरु कृष्ण कांत सोनी ने ग्राम मेंद्राणा के राधा कृष्ण मंदिर में संतों को निशुल्क योग शिविर में कहीं। योग गुरु ने आगे बताया कि समय से उठने से एवं सोने से शरीर ऊर्जा वान बना रहता हैं,समय से भोजन नहीं करनें से शारीरिक कमज़ोरी आने लगती हैं, पेट सम्बंधी रोग होने लगते है।शरीर में अतिरिक्त चर्बी बढ़ने लगती है। स्मरण शक्ति कम होने लगती है, रात्रि में मोबाइल को नही छोडने के कारण आलस्य ज्यादा पनपने लगते है। घुटनों के दर्द के रोगी शुद्ध आहार, गर्म, सुपाच्य चिकनाई युक्त भोजन करें जैसे शुद्ध घी, लहसुन, सोंठ, हल्दी,, खिचड़ी,दलिया,सूप, मूंग की दाल, आसानी से पच जाये और वात ना हो। ठंडी बासी, खट्टी चीजें से दूर रहें। योग गुरु ने संतों को शलभ आसन, रबर आसन, मुद्रा आदि का प्रशिक्षण निशुल्क दिया। योग गुरु ने संतों से विशेष निवेदन किया कि वे खान-पान पर नियंत्रण रखे और शुद्ध भोजन ही ग्रहण करें और बायबास सर्जरी से बचें।इस अवसर पर संत गण श्री राजारामजी महाराज, शिवानंद गिरी महाराज, प्रवीण दास जी महाराज, अयोध्या दास महाराज, अशोक कुमार जोशी सर आदि के साथ भक्त जनो ने भी जीवन उपयोगी गुर सीखे। फोटो संत अयोध्या दास महाराज शलभासन करते हुए।



