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सेंधवा: विधायक मोंटू सोलंकी बोले—सीमित शीतकालीन सत्र जनता की आवाज दबाने का प्रयास

सेंधवा विधायक का आरोप—किसानों और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर चर्चा से सरकार बच रही है

सेंधवा। सेंधवा विधायक मोंटू सोलंकी ने प्रेस नोट जारी कर कहा कि मध्यप्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र को अत्यंत सीमित अवधि में संचालित करने का निर्णय जनता की आवाज को कमजोर करने का प्रयास है। उन्होंने बताया कि सत्र 01 दिसम्बर 2025 से प्रारंभ होकर मात्र तीन दिनों में समाप्त किया जा रहा है, जिसमें 2 दिसम्बर को संक्षिप्त कार्यवाही और 3 दिसम्बर को अवकाश घोषित किया गया है। सोलंकी का कहना है कि यह स्थिति स्पष्ट रूप से दिखाती है कि सरकार किसानों, बेरोजगारों, युवाओं और बिजली जैसी गंभीर समस्याओं पर चर्चा से बचना चाहती है।

विधायक मोंटू सोलंकी ने कहा कि विधानसभा का मुख्य उद्देश्य जनता की समस्याओं को सामने रखकर उस पर सार्थक चर्चा करना है, लेकिन सत्र को संक्षिप्त कर सरकार जनहित के मुद्दों से दूरी बना रही है। उन्होंने कहा कि किसानों को खाद उपलब्ध नहीं हो रही, गेहूं और मक्का का उचित मूल्य नहीं मिल रहा, बिजली व्यवस्था लगातार प्रभावित है और बेरोजगारी गंभीर स्तर पर पहुंच चुकी है। इन सभी मुद्दों पर सवाल उठाने से बचने के लिए सत्र को सीमित किया गया है।

सोलंकी ने विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह किया है कि सत्र की अवधि बढ़ाकर कम से कम 20 दिन की जाए, ताकि प्रदेश की वास्तविक समस्याओं पर विस्तार से चर्चा संभव हो सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता वर्तमान परिस्थितियों को समझ रही है और आने वाले समय में इसका उचित जवाब देगी। उन्होंने कहा, “आप सभी जनता ने मुझे विधानसभा भेजा है और आपकी लड़ाई मैं लगातार लड़ता रहूंगा।” साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि जनता की आवाज को दबाना लोकतंत्र का अपमान है।

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