सेंधवा: इंदल उत्सव के स्वरूप पर आदिवासी समाज की आपत्ति, राज्यपाल का कार्यक्रम रद्द
प्रशासनिक आयोजन को परंपरा के विरुद्ध बताते हुए आदिवासी संगठनों ने इंदल उत्सव के वर्तमान स्वरूप पर आपत्ति दर्ज कराई

राजपुर तहसील के मटली में आयोजित किए जा रहे इंदल उत्सव को लेकर आदिवासी संगठनों का विरोध सामने आया है। परंपरा से अलग स्वरूप देने के आरोपों के बीच राज्यपाल का प्रस्तावित दौरा रद्द किया गया, जबकि उत्सव जारी रहने की सूचना पर समाज में नाराजगी बनी हुई है।
राजपुर तहसील के मटली में प्रशासन द्वारा आयोजित तीन दिवसीय इंदल उत्सव को लेकर विवाद गहरा गया है। आदिवासी संगठनों के कड़े विरोध के चलते मंगलवार को प्रस्तावित महामहिम राज्यपाल का दौरा रद्द कर दिया गया। समाज का कहना है कि यह आयोजन उनकी प्राचीन परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।
परंपरा में मूर्ति और मंदिर का स्थान नहीं
सेंधवा में आयोजित प्रेस वार्ता में आदिवासी एकता परिषद के प्रदेश अध्यक्ष गजानंद ब्राह्मणे, सहित अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने विरोध के कारण स्पष्ट किए। उन्होंने बताया कि इंदल पूजा पूर्णतः पारंपरिक विधि से की जाती है, जिसमें न तो मूर्ति होती है और न ही मंदिर। यह पूजा गांव का पुजारी 5, 7, 9 या 12 वर्ष के अंतराल में व्यक्तिगत या सामूहिक रूप से करता है।
संगठनों का कहना है कि वर्ष 2011 से प्रशासन द्वारा इंदल उत्सव को जिस स्वरूप में आयोजित किया जा रहा है, वह समाज की मूल पहचान के विपरीत है। उनका आरोप है कि इससे आदिवासी परंपराओं की मौलिकता प्रभावित हो रही है।

राज्यपाल के निर्णय का स्वागत, आगे के कार्यक्रम पर नाराजगी
जयस के संस्थापक सदस्य विक्रम अच्छालिया और पोरलाल खरते ने जनभावनाओं का सम्मान करते हुए राज्यपाल द्वारा दौरा रद्द किए जाने के निर्णय का स्वागत किया। हालांकि, उत्सव जारी रखने और प्रभारी मंत्री के संभावित आगमन की सूचना पर समाज ने नाराजगी व्यक्त की।
संस्कृति से न हो खिलवाड़
आदिवासी संगठनों ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी मंदिर या मूर्ति से नहीं, बल्कि आदिवासी संस्कृति को बदले जाने के प्रयासों से है। संगठनों का आरोप है कि पांचवीं अनुसूची वाले आदिवासी बहुल क्षेत्रों में गैर-आदिवासी तत्व उनकी परंपराओं में हस्तक्षेप कर रहे हैं। प्रशासन से ऐसे आयोजनों पर रोक लगाने की मांग की गई है।



