महाराष्ट्र कोऑपरेटिव घोटाला मामले में अजित पवार और परिवार को मिली राहत, कोर्ट ने दी क्लीन चिट
25 हजार करोड़ घोटाले के आरोपों में अदालत ने जांच एजेंसी की रिपोर्ट को सही माना

मुंबई की विशेष अदालत ने महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक घोटाले से जुड़े मामले में उपमुख्यमंत्री अजित पवार और उनके परिवार को क्लीन चिट देते हुए जांच एजेंसी की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली। अदालत ने माना कि मामले में आपराधिक साक्ष्य नहीं मिले।
मुंबई। महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक (MSCB) के कथित 25 हजार करोड़ रुपये घोटाले मामले में मुंबई की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश महेश जाधव ने आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की ‘सी समरी क्लोजर रिपोर्ट’ को मंजूरी देते हुए कहा कि इस मामले में आपराधिक कार्रवाई का आधार नहीं बनता है।
जांच एजेंसी EOW ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि जांच के दौरान मिले तथ्यों में त्रुटि के कारण अजित पवार के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। अदालत ने इस रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए सभी आरोपों को खारिज कर दिया। इस फैसले से अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को भी राहत मिली, क्योंकि उन्हें भी पहले क्लीन चिट दी जा चुकी थी।
यह मामला तब सामने आया जब 2019 में बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश पर जांच शुरू की गई थी। आरोप था कि 2007 से 2017 के बीच बैंक से कर्ज वितरण में अनियमितताएं हुईं, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा। मामले में कई अन्य लोगों के नाम भी शामिल थे।
इस दौरान सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे और अन्य पक्षों ने क्लोजर रिपोर्ट का विरोध किया था, लेकिन अदालत ने उनकी याचिकाओं को खारिज कर दिया। बाद में सरकार बदलने के बाद भी मामले की जांच पर विभिन्न चरणों में विचार हुआ, लेकिन अंततः अदालत ने रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया।



