सेंधवा। सर्पमित्र विशाल त्रिवेदी ने किया मॉनिटर लिजर्ड का रेस्क्यू

जनोदय पंच। सेंधवा। नगर के देवझिरी क्षेत्र में पंडित पवन शर्मा के मकान में मॉनिटर लिजर्ड आ गई थी। नगर के सर्पमित्र विशाल त्रिवेदी ने उसका रेस्क्यू कर वन विभाग को सौंपा।
सर्पमित्र विशाल त्रिवेदी ने बताया कि मॉनिटर लिजर्ड जिसे हिंदी में आमतौर पर श्गोश् या गोहरा कहा जाता है हमारे पारिस्थितिकी तंत्र का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। इनकी भूमिका एक ष्प्राकृतिक सफाईकर्मीष् और ष्नियंत्रकष् के रूप में देखी जाती है।
मॉनिटर लिजर्ड अपने आवास में शीर्ष शिकारी की भूमिका निभाते हैं। ये चूहों, सांपों, कीड़ों और छोटे पक्षियों का शिकार करते हैं। इससे इन जीवों की आबादी नियंत्रित रहती है, जिससे पर्यावरण का संतुलन बना रहता है।
ये जीव केवल शिकार ही नहीं करते, बल्कि मरे हुए जानवरों (सड़े-गले मांस) को भी खाते हैं।
पर्यावरण से मृत अवशेषों को हटाकर ये बीमारियों को फैलने से रोकते हैं। इस प्रकार ये प्रकृति के श्सैनिटरी वर्करश् के रूप में काम करते हैं।
मॉनिटर लिजर्ड खेती के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। वे उन चूहों और कीटों को खाते हैं जो फसलों को नुकसान पहुँचाते हैं।
इनकी उपस्थिति से कीटनाशकों की जरूरत कम हो सकती है।
जब ये शिकार करते हैं और भोजन पचाते हैं, तो उनके मल के माध्यम से मिट्टी को महत्वपूर्ण पोषक तत्व मिलते हैं। यह प्रक्रिया मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में मदद करती है।
मॉनिटर लिजर्ड की मौजूदगी एक स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत है। यदि किसी क्षेत्र में इनकी संख्या अचानक कम होने लगे, तो यह इस बात का संकेत है कि वहां का पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है या खाद्य श्रृंखला में कोई गड़बड़ी आ गई है।

दुर्भाग्य से, खाल के अवैध व्यापार और मांस के लिए इनका शिकार किया जाता है। भारत में यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित हैं। इनका लुप्त होना पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बिगाड़ सकता है।
एक रोचक तथ्यरू मॉनिटर लिजर्ड काफी बुद्धिमान होते हैं और कुछ प्रजातियां तो गिनती करने में भी सक्षम पाई गई हैं।



