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तालाब निर्माण के विरोध में ग्रामीणों ने सौंपा ज्ञापन, उठाई वैधानिक आपत्तियां, अधिकार पत्र और मुआवजे की मांग को लेकर ग्रामीण पहुंचे प्रशासन के पास

प्रभावित परिवारों को अधिकार पत्र और पुनर्वास की मांग,  ग्राम सभा की अनुमति के बिना निर्माण शुरू करने का आरोप

जनोदय पंच, बड़वानी। ग्राम अंबापानी सहित आसपास के गांवों के ग्रामीणों ने प्रस्तावित तालाब निर्माण के विरोध में प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। प्रभावित परिवारों ने अधिकार पत्र, पारदर्शी सर्वे और वैधानिक पुनर्वास सुनिश्चित होने तक निर्माण कार्य रोकने की मांग की है।

ग्राम अंबापानी, ग्राम पंचायत सोनखेडी, जिला बड़वानी (म.प्र.) के ग्रामीणों और कृषकों ने 9 अप्रैल 2026 को प्रस्तावित तालाब निर्माण कार्य के संबंध में अपनी वैधानिक आपत्तियाँ प्रस्तुत करते हुए जिलाधीश, बड़वानी के नाम ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय, सेंधवा में प्रस्तुत किया गया।

  


प्रभावित परिवारों के अधिकारों का मुद्दा

ग्रामीणों ने बताया कि प्रस्तावित स्थल से अनेक परिवार डूब और प्रभाव क्षेत्र में आ रहे हैं। प्रभावित परिवारों में लगभग 25 लोगों को अब तक अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 के तहत अधिकार पत्र प्राप्त नहीं हुए हैं, जबकि वे वर्षों से भूमि पर काबिज और खेतीरत हैं। लगभग 26 परिवार ऐसे हैं जिनका भूमि पर वास्तविक कब्जा है, परंतु उनके दावों का निराकरण और वैधानिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। जिन किसानों को अधिकार पत्र दिए गए हैं, वे भी वास्तविक कब्जे से कम क्षेत्रफल के हैं।

ग्रामीणों ने यह भी आपत्ति दर्ज की कि तालाब निर्माण के लिए सर्वे और मापन की जानकारी ग्रामवासियों को नहीं दी गई। साथ ही प्रभावित मकान, पेड़-पौधों और कृषि भूमि के मूल्यांकन तथा पुनर्वास के संबंध में कोई पारदर्शी प्रक्रिया साझा नहीं की गई है।


ग्राम सभा में पारित प्रस्ताव

7 अप्रैल 2026 को ग्राम अंबापानी में पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम, 1996 के प्रावधानों के तहत आयोजित ग्राम सभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया। इसमें कहा गया कि जब तक सभी प्रभावित परिवारों को वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत वास्तविक अधिकार पत्र नहीं दिए जाते और “मकान के बदले मकान एवं जमीन के बदले जमीन” का वैधानिक पुनर्वास सुनिश्चित नहीं किया जाता, तब तक तालाब निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं किया जाए।


 बिना अनुमति निर्माण के प्रयास का आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम सभा की पूर्व अनुमति के बिना निर्माण कार्य शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। स्थल पर मशीनें और सामग्री रखी गई है, जो पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत है।


 प्रशासन से की गई प्रमुख मांगें

ज्ञापन में प्रशासन से मांग की गई है कि सभी वैधानिक कमियों के निराकरण तक निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाई जाए। लंबित दावों का त्वरित निराकरण कर वास्तविक कब्जे के अनुसार अधिकार पत्र दिए जाएँ। जिन परिवारों के पास दस्तावेज नहीं हैं, उनके दावों का प्राथमिकता से परीक्षण किया जाए। प्रभावित परिवारों को मकान के बदले मकान और जमीन के बदले जमीन का वैधानिक पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए। सर्वे और मूल्यांकन ग्राम सभा की उपस्थिति में पारदर्शी ढंग से कराया जाए तथा विधि अनुसार पुनर्वास, मुआवजा और ग्राम सभा की अनिवार्य सहमति सुनिश्चित की जाए।

ग्रामीणों ने प्रशासन से न्यायोचित कार्रवाई कर उनके वैधानिक अधिकारों की रक्षा करने की मांग की है। ज्ञापन के साथ 7 अप्रैल 2026 की ग्राम सभा प्रस्ताव प्रति और ग्रामवासियों के हस्ताक्षर संलग्न किए गए हैं।

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