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वरला लिफ्ट नर्मदा उद्वहन सिंचाई परियोजना को लेकर भोपाल में उच्चस्तरीय चर्चा, 33 गांवों को मिलेगा लाभ

जनोदय पंच। सेंधवा। सेंधवा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत वरला तहसील के किसानों के लिए बहुप्रतीक्षित वरला लिफ्ट नर्मदा उद्वहन सिंचाई परियोजना को लेकर गुरुवार को महत्वपूर्ण पहल की गई। अंतरसिंह आर्य, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के माननीय अध्यक्ष ने बड़वानी जिले की वरला तहसील से जुड़ी इस महत्वाकांक्षी परियोजना के संबंध में नर्मदा घाटी विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा से विस्तृत चर्चा की।

बैठक में परियोजना की वर्तमान स्थिति, प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृतियां, डीपीआर की प्रगति तथा कार्यारंभ की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया गया। श्री आर्य ने कहा कि यह परियोजना वरला क्षेत्र के हजारों किसानों के लिए वरदान सिद्ध होगी। नर्मदा के जल से सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने पर कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, फसल विविधिकरण को बढ़ावा मिलेगा तथा किसानों की आय में स्थायी सुधार आएगा।

33 गांवों को मिलेगा सीधा लाभ
वरला लिफ्ट सिंचाई परियोजना से कुल 33 गांव सीधे लाभान्वित होंगे। इनमें धवली, गेरूघाटी, कमोद, पनाली, बिलवा, खोखरी, पांजलिया, खट्टी, धमनिया, जामटी, बालवाड़ी, देवली, बेलघाट, दुगानी, उमरटी, राजनगांव, घेघाव, दूधखेड़ा, बढ़ियापानी, बाखरली, केरमला, खुटवाड़ी, वरला, चिखली, होल, पेंडारनिया, सैली, हिंगवा, मालवण, सोलवन, मेदल्यापानी, कोलकी एवं कुंडिया शामिल हैं।
परियोजना के पूर्ण होने पर इन गांवों में सिंचित रकबे में व्यापक वृद्धि होगी, जिससे खरीफ के साथ-साथ रबी एवं ग्रीष्मकालीन फसलों का उत्पादन भी संभव हो सकेगा।

डीपीआर एक नजर में
जल स्रोत – नर्मदा नदी (मोहिपुरा)
जल आवश्यकता – 51.5 एमसीएम
लाभान्वित गांव – 33
कुल प्रस्तावित सिंचाई क्षेत्र – 15,500 हेक्टेयर
ऊर्जा आवश्यकता – 30.50 मेगावाट
अधिकतम लिफ्ट – 664 मीटर
अनुमानित लागत – ₹860 करोड़
प्रति हेक्टेयर लागत – लगभग ₹5.55 लाख
यह परियोजना तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि 664 मीटर की अधिकतम लिफ्ट के माध्यम से ऊंचाई वाले क्षेत्रों तक पानी पहुंचाया जाएगा। इसके लिए पर्याप्त विद्युत व्यवस्था भी प्रस्तावित है।

पूर्व परियोजना से मिला आधार
भाजपा प्रवक्ता सुनील अग्रवाल ने बताया कि सेंधवा विधानसभा क्षेत्र में पूर्व में रामचंद्र विट्ठल बड़े नर्मदा उद्वहन सिंचाई परियोजना का कार्य प्रारंभ हो चुका है। उसी तर्ज पर अब वरला तहसील के किसानों को भी नर्मदा जल से सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए उच्च स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि डीपीआर तैयार हो चुकी है और शासन स्तर पर आवश्यक स्वीकृतियों की प्रक्रिया को गति देने के प्रयास जारी हैं। यह परियोजना क्षेत्र के किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगी।

किसानों में उम्मीद की किरण
वरला क्षेत्र लंबे समय से वर्षा आधारित खेती पर निर्भर रहा है, जिससे किसानों को अनिश्चित उत्पादन और आय की समस्या का सामना करना पड़ता है। नर्मदा उद्वहन सिंचाई परियोजना के माध्यम से स्थायी सिंचाई व्यवस्था सुनिश्चित होने पर क्षेत्र में कृषि आधारित उद्योगों, पशुपालन एवं उद्यानिकी को भी बढ़ावा मिलेगा। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष श्री अंतरसिंह आर्य ने कहा कि क्षेत्र के सर्वांगीण विकास एवं किसानों की समृद्धि के लिए वे प्रतिबद्ध हैं और इस परियोजना को शीघ्र धरातल पर उतारने के लिए निरंतर प्रयास जारी रहेंगे। यदि यह परियोजना समयबद्ध रूप से क्रियान्वित होती है तो वरला तहसील का कृषि परिदृश्य पूरी तरह बदल सकता है और हजारों किसान परिवारों के जीवन में नई समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा। इसके साथ ही आर्य ने पानसेमल विधानसभा क्षेत्र के पानसेमल में भी नर्मदा का जल सिंचाई हेतु जाए इस हेतु पानसेमल नर्मदा उद्वहन सिंचाई परियोजना के संबंध में भी चर्चा की गई । ज्ञात रहे कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने पानसेमल आगमन पर इसकी घोषणा की गई थी ।

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