काव्य मंच की गोष्ठी में व्यंग्य, कविता और ग़ज़लों ने बांधा समां, “दो केलों का वजन तुम क्या जानों…” जैसे व्यंग्य पर गूंजा ठहाकों का शोर

सेंधवा में शनिवार को काव्य मंच के तत्वावधान में एक साहित्यिक काव्य गोष्ठी का आयोजन निवाली रोड स्थित सेंधवा पब्लिक स्कूल परिसर में किया गया। विविध विधाओं की रचनाओं, व्यंग्य और ग़ज़लों से सजी इस गोष्ठी में साहित्य प्रेमियों ने रचनात्मक अभिव्यक्तियों का आनंद लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुई। गोष्ठी में कवियों और शायरों ने समय, समाज, जीवन, व्यापार और मानवीय संवेदनाओं से जुड़े विषयों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। मोहित गोयल ने “आराम करने वाली छुट्टी साथ अब काम लाती है…” कविता के माध्यम से बचपन की यादों और समय के बदलाव को उकेरा। विनय मंडलोई ने “मैं समय को रोक देता यदि मुझे पता होता…” रचना से समय के महत्व को रेखांकित किया।
डॉक्टर सन्नी सोनी ने प्रयास और सफलता पर केंद्रित अपनी कविता सुनाई, वहीं शिक्षक निर्मल चौहान और गिरीश त्रिवेदी ने निमाड़ी भाषा में रचनाएं प्रस्तुत कर क्षेत्रीय रंग भरा। राजेंद्र सोनवणे राही ने व्यंग्य “दो केलों का वजन तुम क्या जानों राही बाबू…” सुनाकर श्रोताओं को हंसी से सराबोर कर दिया। शाकिर शैख शाकिर ने ग़ज़ल के माध्यम से भावनात्मक अभिव्यक्ति दी।

कार्यक्रम में मंजुला शर्मा ने विधाता छंद की प्रस्तुति दी। हाफ़िज़ अहमद हाफ़िज़ ने ग़ज़ल के शेरों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। कार्यक्रम के सूत्रधार पवन शर्मा हमदर्द ने व्यापार से जुड़ी पीड़ा को अपनी रचना में पिरोया। युवा शायर वाजिद हुसैन साहिल ने तरन्नुम में ग़ज़ल सुनाकर वाहवाही लूटी।
अजय चौहान और दीपक भार्गव ने हास्य प्रसंग सुनाए, जबकि विशाल त्रिवेदी आदिल ने सर्दी के मौसम पर आधारित रचना से तालियां बटोरीं। डॉ. जी.सी. खले ने शिवमंगल सिंह सुमन से जुड़े संस्मरण और हास्य व्यंग्य प्रस्तुत किए। प्रोफेसर के.आर. शर्मा ने संचालन के अनुभव साझा किए।
कार्यक्रम के अंत में पी.एम. श्री जवाहर नवोदय स्कूल अलीराजपुर में काव्य सृजन कार्यशाला में प्रशिक्षक के रूप में सेवाएं देने पर विशाल त्रिवेदी अल्पज्ञ को सम्मानित किया गया। काव्य गोष्ठी का संचालन शिक्षक मनोज मराठे ने किया।



