सेंधवा पुलिस की पहल — बच्चों को सिखाया ऑनलाइन ठगी और असुरक्षा से बचाव के तरीके
ऑपरेशन मुस्कान’ अभियान के तहत सेंधवा पुलिस ने स्कूल में विद्यार्थियों को बाल सुरक्षा, महिला सुरक्षा और साइबर अपराध से बचाव के उपाय बताए।

सेंधवा में पुलिस विभाग ने ‘ऑपरेशन मुस्कान’ के अंतर्गत एक निजी स्कूल में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में बाल सुरक्षा, साइबर अपराध से बचाव, महिला सुरक्षा और ऑनलाइन ठगी से बचने के उपायों की जानकारी विद्यार्थियों को दी गई।
स्थानीय एक निजी विद्यालय में शुक्रवार को पुलिस विभाग द्वारा ‘ऑपरेशन मुस्कान’ के तहत विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अभियान का उद्देश्य अपहृत और गुमशुदा बच्चों की तलाश के साथ-साथ बाल सुरक्षा, महिला सुरक्षा और साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता फैलाना है। पुलिस अधिकारियों ने विद्यार्थियों को बाल सुरक्षा से संबंधित बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी दी।
एसडीओपी अजय वाघमारे ने दी महत्वपूर्ण सलाह
एसडीओपी अजय वाघमारे ने कार्यक्रम में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि या अनुचित स्पर्श को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को “गुड टच-बैड टच” की पहचान करने, ऑनलाइन खतरे से सतर्क रहने और किसी असहज स्थिति में तुरंत अपने माता-पिता, शिक्षकों या पुलिस को सूचित करने की सलाह दी। वाघमारे ने इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग पर जोर देते हुए अनजान कॉल, लिंक या फ्रेंड रिक्वेस्ट से बचने की अपील की।
टीआई बलजीत सिंह बिसेन ने बताया ‘डिजिटल अरेस्ट’ का खतरा
टीआई बलजीत सिंह बिसेन ने विद्यार्थियों को साइबर ठगी के बढ़ते मामलों से सावधान रहने को कहा। उन्होंने बताया कि कुछ ठग “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर लोगों को डराकर पैसे ऐंठने की कोशिश करते हैं, जबकि पुलिस विभाग में ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं होती। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि किसी संदिग्ध कॉल पर विश्वास न करें और ठगी होने पर तुरंत 1930 नंबर पर शिकायत दर्ज कराएं। बिसेन ने छात्रों को नई ऑनलाइन ठगी की तकनीकों से सतर्क रहने और यातायात नियमों का पालन करने की भी सलाह दी।
बच्चों ने उत्साह से लिया हिस्सा
कार्यक्रम में विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षक और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यार्थियों ने साइबर सुरक्षा और आत्मरक्षा से जुड़े कई प्रश्न पूछे, जिनके उत्तर पुलिस अधिकारियों ने सरल भाषा में दिए। स्कूल प्रबंधन ने पुलिस विभाग की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने और सुरक्षा के प्रति सजगता लाने में सहायक हैं।



