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सेंधवा: 12 ज्योतिर्लिंग यात्रा पर निकले उड़ीसा के रिंकू स्वाई का धार्मिक मंच ने किया स्वागत

उड़ीसा से शुरू हुई साइकिल यात्रा के दौरान सेंधवा पहुंचने पर स्थानीय धार्मिक मंच ने पुष्पमाला, शाल और श्रीफल भेंट कर किया स्वागत

जनोदय पंच। सेंधवा। उड़ीसा निवासी रिंकू स्वाई देश के 12 ज्योतिर्लिंगों की साइकिल यात्रा पर निकले हैं। 60 दिन की यात्रा पूरी कर वे सेंधवा पहुंचे। यहां धार्मिक मंच के सदस्यों ने उनका स्वागत किया। उनका उद्देश्य सनातन धर्म का प्रचार और युवाओं में देवी-देवताओं के प्रति आस्था जागृत करना है।


उड़ीसा से शुरू हुई 12 ज्योतिर्लिंग साइकिल यात्रा

सेंधवा। रिंकू स्वाई उड़ीसा के रहने वाले हैं। वे गंजाम जिले के बुरूपड़ा तहसील हिंजीलीकाटू के निवासी हैं। धर्म के प्रवर्तक के रूप में उन्होंने साइकिल से देश के 12 ज्योतिर्लिंग की यात्रा करने का संकल्प लिया है। सबसे पहले मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग पहुंचकर उन्होंने इस यात्रा का प्रारंभ किया। इसके बाद वे रामेश्वरम पहुंचे। रामेश्वरम के बाद नासिक के त्र्यंबकेश्वर के दर्शन किए। इसके बाद नागेश्वर और सोमनाथ के दर्शन करते हुए द्वारिका पहुंचे और सूरत होते हुए सेंधवा पहुंचे।

सेंधवा में धार्मिक मंच ने किया स्वागत

मध्य प्रदेश की सीमा में प्रवेश कर सेंधवा पहुंचने पर धार्मिक मंच की ओर से उनका परिचय लिया गया। बिजासन से जुड़े सेवादार अजय पालीवाल की दुकान पर मनोज मराठे, अजय पालीवाल, काली नीगम, गोपाल पाटील सहित अन्य लोगों ने पुष्पमाला पहनाकर उनका स्वागत किया। चाय दुकान संचालक पालीवाल ने उन्हें कुल्हड़ की चाय पिलाई। साथ ही गमछा, शाल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया।

सनातन धर्म के प्रचार का उद्देश्य

धार्मिक यात्री रिंकू स्वाई ने बताया कि साइकिल से यात्रा करने में उन्हें किसी प्रकार की परेशानी नहीं आई। ईश्वर के आशीर्वाद से वे अब तक 60 दिन की यात्रा पूरी कर चुके हैं। आगे लगभग ढाई महीने की यात्रा शेष है, जिसमें वे ओंकारेश्वर, महाकाल उज्जैन, बागेश्वर धाम सरकार, खाटू श्याम, वृंदावन और अयोध्या जाएंगे। इसके बाद 12 ज्योतिर्लिंग की इस धार्मिक यात्रा का समापन करेंगे। उन्होंने बताया कि यह यात्रा लगभग 7 से 8 हजार किलोमीटर की होगी। रास्ते में जो भी भोजन मिलता है, वही ग्रहण कर लेते हैं। उनका उद्देश्य केवल सनातन धर्म का प्रचार और युवाओं में देवी-देवताओं के प्रति आस्था जागृत करना है। रिंकू स्वाई सूरत में साड़ी कंपनी में वर्कर हैं और शिव भक्ति के चलते उन्होंने विवाह भी नहीं किया।


 

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