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सेंधवा: वन अधिकार कानून और पेसा कानून के पालन को लेकर आदिवासी समाज ने प्रशासन को चेताया

मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए ज्ञापन में आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा और लंबित दावों के शीघ्र निराकरण की मांग की गई

सेंधवा में आदिवासी मुक्ति संगठन ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर वन अधिकार कानून 2006 और पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग की। ज्ञापन में लंबित व्यक्तिगत और सामुदायिक दावों की शीघ्र सुनवाई व आदिवासी समाज को उनके अधिकार दिलाने की मांग रखी गई।

सेंधवा में आदिवासी मुक्ति संगठन द्वारा एसडीएम कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री मोहन यादव के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में वन अधिकार कानून 2006 और पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन, आदिवासी समाज को उनकी वन भूमि पर अधिकार की मान्यता, तथा अब तक लंबित दावों के त्वरित निराकरण की मांग की गई। संगठन ने बताया कि बड़वानी जिला आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र होने के बावजूद संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आने वाले कई ग्रामों में इन कानूनों का क्रियान्वयन नहीं हुआ है। कई ग्राम सभाओं द्वारा प्रस्तुत दावे अब तक लंबित हैं।


चार प्रमुख मांगें रखीं

ज्ञापन में चार प्रमुख बिंदुओं पर कार्रवाई की मांग की गई है—

  1. लंबित व्यक्तिगत और सामुदायिक वन अधिकार दावों की शीघ्र जांच और वितरण किया जाए।

  2. जिन ग्राम सभाओं ने आवेदन दिए हैं, उनकी सुनवाई प्राथमिकता से की जाए।

  3. जिन पात्र आदिवासियों को भूमि का अधिकार नहीं मिला है, उन्हें शीघ्र लाभान्वित किया जाए।

  4. जिन अधिकारियों या कर्मचारियों ने कानून की अनदेखी की है, उन पर कार्यवाही की जाए।


“आदिवासी समाज की पहचान से जुड़ा कानून”

किसान कांग्रेस जिला अध्यक्ष सीलदार सोलंकी ने कहा कि “आदिवासी समाज हमारे देश की आत्मा है। उनके अधिकारों की रक्षा करना समाज के हर जिम्मेदार व्यक्ति का कर्तव्य है। वन अधिकार कानून और पेसा कानून आदिवासियों की पहचान और अस्तित्व से जुड़े हैं। यदि इन कानूनों का सही क्रियान्वयन नहीं हुआ, तो आदिवासी समाज अपने संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई को और मजबूत करेगा। सरकार को चाहिए कि दावों का जल्द निराकरण करे ताकि आदिवासियों को उनका हक मिल सके।”


संगठन ने दी चेतावनी

सोलंकी ने कहा कि यदि शासन-प्रशासन ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो आदिवासी समाज आंदोलन के लिए बाध्य होगा, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। इस दौरान राजेश कानोजे, गुच्छा जमरा, पोरवाल खरते, गेंदराम भाई, दूरसिंह पटेल, अमरसिंग भाई, अधिवक्ता चेनसिंह अच्छाले, अमित गुर्जर, परसराम सेनानी, सुनील नरगावे, प्रशांत सेन, सीताराम बर्डे, शोभाराम पटेल, मेमाराम बर्डे, खुमसिंग कन्नौजे, राजाराम जाधव, चंदन डावर सहित आदिवासी समाज के सदस्य, किसान कांग्रेस कार्यकर्ता और सामाजिक संगठन के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।


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