धुले लोकसभा सांसद शोभाताई बच्छाव की मांग का संघर्ष समिति प्रमुख मनोज मराठे ने किया स्वागत, मुआवजे को लेकर औरंगाबाद हाईकोर्ट जाने की तैयारी

जनोदय पंच। धुले। इंदौर रेल लाइन इस महत्वपूर्ण परियोजना के कार्य में वर्तमान में विभिन्न बाधाएं उत्पन्न हो गई हैं और कई स्थानों पर काम बंद स्थिति में है। इस मुद्दे को लेकर धुले लोकसभा क्षेत्र की सांसद शोभाताई बच्छाव ने मुंबई जाकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तथा राज्य के महसूल मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे से मुलाकात की और किसानों के मुआवजे को बढ़ाने तथा परियोजना में आ रही बाधाओं को दूर करने के संबंध में निवेदन दिया।
सांसद द्वारा उठाए गए इस कदम का मनमाड-इंदौर रेलवे संघर्ष समिति के प्रमुख मनोज मराठे ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि किसानों के मुआवजे और परियोजना को गति देने के लिए सांसद द्वारा किया गया प्रयास सराहनीय है और इससे प्रभावित किसानों को न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
उत्तर महाराष्ट्र के धुले जिले सहित मध्य प्रदेश से सीधा रेल संपर्क स्थापित करने की दृष्टि से मनमाड-धुले-इंदौर रेलमार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण परियोजना है। इस परियोजना से औद्योगिक, व्यापारिक तथा यात्री परिवहन को बड़ी गति मिलने की संभावना है। लेकिन वर्तमान में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में उत्पन्न विभिन्न समस्याओं के कारण इस परियोजना का कार्य कई स्थानों पर रुक गया है।
धुले लोकसभा क्षेत्र के कई गांवों के किसानों और नागरिकों से भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को लेकर लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। विशेष रूप से जमीन के दाम तय करते समय वर्तमान बाजार भाव को ध्यान में न रखते हुए पुराने दरों के आधार पर मुआवजा तय किए जाने की किसानों की शिकायत है। इससे कई परियोजना प्रभावित किसानों में असंतोष पैदा हो गया है। भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट जानकारी न होने से प्रभावित किसानों और नागरिकों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है, इसलिए इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और उचित मुआवजा दिया जाना आवश्यक है।
लागत में 12 गुना वृद्धि
संघर्ष समिति प्रमुख मनोज मराठे ने कहा कि वर्ष 2009 में इस परियोजना की लागत लगभग 1500 करोड़ रुपये निर्धारित की गई थी, जबकि वर्तमान में इसकी लागत बढ़कर लगभग 18 से 20 हजार करोड़ रुपये के बीच आर्थिक स्वीकृति के साथ तय की गई है, जो कि लगभग 12 गुना वृद्धि को दर्शाती है।
श्री मराठे ने आगे कहा कि जब परियोजना के अन्य संसाधनों और निर्माण लागत में वर्ष 2009 की तुलना में लगभग 12 गुना वृद्धि की गई है, तो किसानों की जमीन का मूल्य आज भी पुराने दरों के आधार पर क्यों तय किया जा रहा है। यदि अन्य संसाधनों का मूल्य कई गुना बढ़ाया जा सकता है, तो किसानों की भूमि को भी इस परियोजना का महत्वपूर्ण संसाधन मानते हुए उसका मूल्य वर्तमान समय के अनुसार बढ़ाया जाना चाहिए।
लोकसभा के प्रश्नकाल में भी उठाने का प्रयास
श्री मराठे ने आगे कहा कि संघर्ष समिति इस विषय को गंभीरता से उठाएगी और क्षेत्र के सांसदों के माध्यम से इसे लोकसभा के प्रश्नकाल में भी उठाने का प्रयास किया जाएगा। इस संबंध में इंदौर के सांसद शंकर लालवानी, धार सांसद एवं केंद्रीय मंत्री श्रीमती उषा ठाकुर, खरगोन सांसद गजेंद्र पटेल तथा खंडवा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल सहित अन्य जनप्रतिनिधियों से भी इस विषय को लोकसभा में उठाने के लिए आग्रह किया जाएगा, ताकि किसानों को उचित मुआवजा मिल सके और परियोजना में आ रही बाधाएं दूर हो सकें।
श्री मराठे ने आगे यह भी कहा कि यदि समय रहते इस मामले पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया, तो संघर्ष समिति किसानों के हित में कानूनी रास्ता अपनाएगी। उन्होंने बताया कि पहले भी मनमाडदृइंदौर रेल परियोजना को घाटे का नहीं बल्कि लाभदायक परियोजना सिद्ध करने तथा राज्यों की हिस्सेदारी के नाम पर लगाई गई अड़चन को दूर करने के लिए जनहित याचिका लगाकर रेलवे से पूरी लागत की मंजूरी दिलाने में सहयोग किया गया था।
श्री मराठे ने आगे कहा कि अब उसी तर्ज पर किसानों की जमीन को भी परियोजना का आवश्यक संसाधन मानते हुए अन्य संसाधनों की तरह उसका मूल्य बढ़ाने की मांग की जाएगी। इसके लिए संघर्ष समिति के अन्य सदस्यों और जनप्रतिनिधियों से चर्चा के बाद इंदौर या औरंगाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करने की तैयारी की जा रही है।
इस प्रस्तावित याचिका में यह मांग भी की जाएगी कि परियोजना का कार्य जारी रखते हुए किसानों को उचित और बढ़ा हुआ मुआवजा दिया जाए तथा जिन खेतों से रेल लाइन गुजर रही है वहां किसानों के आने-जाने के लिए वैकल्पिक रास्तों की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।
मनमाड-धुले-इंदौर रेलमार्ग उत्तर महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना है। इस मार्ग के बनने से धुले, नंदुरबार, सटाणा, मालेगांव तथा आसपास के क्षेत्रों के नागरिकों को रेल सुविधा का बड़ा लाभ मिलेगा और औद्योगिक तथा व्यापारिक विकास को भी गति मिलेगी। इसलिए परियोजना में आ रही बाधाओं को दूर कर इसका काम जल्द शुरू करने की मांग लगातार उठाई जा रही है



