“बैर की गांठ जीवन ही नहीं, कई जन्म बिगाड़ देती है: प्रकाश मुनि”
जैन स्थानक में प्रवचन, दान, तप और समभाव के महत्व पर दिया संदेश

जनोदय पंच। सेंधवा। जीवन में कभी किसी के साथ बैर की गांठ मत बांधना क्योंकि कैंसर की गठन तो हमारा यह जन्म खराब करेगी पर बैर की गांठ हमारे ना जाने कितने भव (जन्म) खराब कर देगी इसलिए हमें मन में किसी के प्रति बदले की भावना नहीं रखना चाहिए।
उक्त उदगार मानव केसरी पूज्य श्री सौभाग्यमल जी महाराज साहब के सुशिष्य प्रवर्तक पूज्य प्रकाश मुनि जी महाराज साहब ने जैन स्थानक में कहे, आपने कहा कि आज हमारे पास ज्ञान तो बहुत है पर चिंतन का अभाव है, हम सही दिशा में चिंतन करें और इस बात को समझे कि हम क्या कर रहे हैं और क्यों कर रहे हैं, हम अच्छा कर रहे हैं या बुरा कर रहे हैं ? हमें दिन में कम से कम 15 मिनट चिंतन अवश्य करना चाहिए कि हमने पूरे दिन में क्या सही किया क्या गलत किया? क्या अच्छा किया क्या बुरा किया? क्या पाप किया और क्या पुण्य किया ? और इस चिंतन के माध्यम से अपने आप को सकारात्मक करने का प्रयास करना चाहिए साथ ही जीवन में समभाव लाना चाहिए । जितना हम समभाव में रहेंगे उतना हम धर्म के स्वरूप को समझ पाएंगे, समभाव अर्थात क्रोध, मान, माया रूपी कषायो से से दूर रहना यही सच्ची साधना का रूप है। आपने कहा कि दान, शील, तप धर्म का रूप है , दान का अर्थ है मोह का त्याग यदि धन और संपत्ति के प्रति यदि हमारे में बहुत अधिक मोह और ममता है तो फिर दान की भावना हमारे भीतर नहीं आ सकती है। यदि धन का मोह कम हुआ तब ही हम उसे परोपकार में लगा सकते हैं इसलिए जब-जब भी मौका मिले अपने स्वयं के उपयोग का रख करके ओर धन के मोह को कम करके उसे परोपकार में लगा देना चाहिए। हमारे शास्त्रों में ऐसे कई श्रावकों के वर्णन है जिन्होंने अपने स्वयं के उपयोग का रखकर अपनी धन संपत्ति को परोपकार में लगाया है। उक्त धर्म सभा में घेवरचंद बुरड़, बी.एल. जैन, प्रकाश सुराणा, अशोक सकलेचा, राजेंद्र कांकरिया, मांगीलाल सुराणा, महेश मित्तल, भूषण जैन, कुलदीप पाटीदार, पूनम सुराणा अनेक श्रावक श्राविकाएं एवं बाहर गांव से आए दर्शनार्थी उपस्थित थे ।



