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सेंधवा में यूजीसी के खिलाफ सवर्ण समाज मे आक्रोश, रैली निकाल सौपा ज्ञापन

सेंधवा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों के खिलाफ सामान्य वर्ग (सवर्ण समाज) ने विरोध जताते हुए रेली निकालकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से ज्ञापन एसडीएम आशीष को सौंप कर नियमों को वापस लेने की मांग की है ।

सामान्य वर्ग (सवर्ण समाज) अग्रवाल समाज के सुनील अग्रवाल ने बताया कि यूजीसी के खिलाफ सामान्य वर्ग ने आज दोपहर 12 बजे सत्यनारायण मंदिर से बड़ी संख्या में लोगों ने क्रमबद्ध रूप से चलते हुए यूजीसी के खिलाफ नारे लगाते हुए एसडीएम कार्यालय पहुंचे । जहां पर एसडीएम आशीष को समाजजनों ने आक्रोश व विरोध जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से ज्ञापन सौंपा । ज्ञापन का वाचन सुनील अग्रवाल ने करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री मोदी को दिए पत्र में व्यक्त किया
सेंधवा क्षेत्र के सामान्य वर्ग (सवर्ण समाज) के नागरिक, अत्यंत रोष, पीड़ा एवं आक्रोश के साथ यह ज्ञापन प्रस्तुत कर रहे हैं। यूजीसी द्वारा लागू किए गए नए नियम सामान्य वर्ग को योजनाबद्ध तरीके से शिक्षा, अवसर और न्याय से वंचित करने का माध्यम बनते जा रहे हैं, जिसे अब किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। देश का सामान्य वर्ग वर्षों से संविधान में निहित समानता के सिद्धांतों का पालन करते हुए राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाता आया है, किंतु दुर्भाग्यवश आज वही वर्ग नीतिगत भेदभाव का सबसे बड़ा शिकार बन रहा है। पत्र में *गंभीर आपत्तियाँ एवं आक्रोश* व्यक्त करते हुए बताया कि इस नियम से सामान्य वर्ग के भविष्य पर सीधा हमला । यूजीसी के नए नियम सामान्य वर्ग के मेधावी विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा एवं रोजगार से बाहर करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। ज्ञापन रैली के अंत में विवेक तिवारी, सचिन शर्मा, परीक्षित शर्मा ने सभी का आभार व्यक्त किया ।

संविधान की मूल भावना से खिलवाड़

अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (गरिमापूर्ण जीवन) की भावना को यह नियम खुलेआम चुनौती देते हैं। योग्यता को दरकिनार कर वर्ग विशेष को लाभ पहुँचाना, शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने के समान है। निरंतर नीतिगत निर्णयों से यह संदेश जा रहा है कि सामान्य वर्ग के अधिकार सरकार की प्राथमिकता नहीं हैं।

धैर्य की सीमा समाप्त

सामान्य वर्ग ने अब तक संयम रखा है, किंतु यदि अन्याय जारी रहा तो यह असंतोष आंदोलन का व्यापक रूप ले सकता है। यूजीसी के नए नियमों को तत्काल प्रभाव से पूर्णतः रद्द किया जाए।
सामान्य वर्ग को समान शिक्षा, समान अवसर और समान न्याय की संवैधानिक गारंटी सुनिश्चित की जाए।
शिक्षा एवं नियुक्तियों में मेरिट आधारित व्यवस्था को बाध्यकारी बनाया जाए।
सामान्य वर्ग के प्रतिनिधियों को शामिल कर उच्चस्तरीय पुनर्विचार समिति का गठन किया जाए।
भविष्य में बिना सर्वसम्मति के किसी भी वर्ग-विरोधी नियम को लागू न किया जाए।
*चेतावनी* :
यह ज्ञापन केवल एक निवेदन नहीं, बल्कि सामान्य वर्ग की पीड़ा और चेतावनी है।
यदि शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो सामान्य वर्ग लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से उग्र आंदोलन, धरना-प्रदर्शन एवं व्यापक जनआंदोलन के लिए बाध्य होगा, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

हम किसी वर्ग के विरोधी नहीं हैं, परंतु अपने अधिकारों के हनन को अब और सहन नहीं करेंगे।
सामान्य वर्ग को भी इस देश में सम्मान, अवसर और न्याय चाहिए — दया नहीं, अधिकार चाहिए। अतः आपसे मांग है कि इस विषय पर तत्काल हस्तक्षेप कर सामान्य वर्ग के साथ हो रहे अन्याय को समाप्त करें।
ज्ञापन रैली में महिलाएं भी मौजूद थी । ज्ञापन रैली के समापन पर सामान्य वर्ग (सवर्ण समाज) की ओर से सभी समाज बंधुओ का आभार व्यक्त किया । ज्ञापन के दौरान सुनील अग्रवाल ने बताया कि हमारी लड़ाई किसी वर्ग के लिए नहीं है वरन समान अधिकार, समान शिक्षा, समान न्याय सबको मिले, यह नियमों में कई विसंगियां है जिसे सर्वदलीय बैठक से हल की जानी चाहिए । ज्ञापन देने वालों में गिरवर शर्मा, श्यामसुंदर तायल, कैलाश एरन, निलेश जैन, बद्री प्रसाद शर्मा, पंकज झावर, अजय गुप्ता, दामोदर शर्मा, मोहन जोशी, घनश्याम पालीवाल, मनीष मंडोला, दिलीप कानूनगो, महेश सोनी, लक्ष्मी शर्मा, निशा शर्मा, विमला शर्मा, ज्योत्सना अग्रवाल, रितु गोयल, सुप्रिया वैद्य, संतोष शर्मा, ज्योति शर्मा, रेखा शर्मा, प्रीति झवर, कमलाकर सोनी, दिलीप झावर, आदि मौजूद थे ।

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