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सेंधवा में काव्य मंच और बज़्में अदब की संयुक्त काव्य गोष्ठी, शायरी-कविताओं से सजी महफिल

मनोज मराठे ‘मन’ की अध्यक्षता में काव्य गोष्ठी, वाजिद हुसैन साहिल ने किया संचालन

जनोदय पंच। सेंधवा हायर सेकेंडरी स्कूल के पास स्थित अर्श स्टूडियो में साहित्यिक संस्था सेंधवा काव्य मंच एवं बज़्में अदब के संयुक्त तत्वावधान में काव्य गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में शायरों ने ग़ज़ल, अशआर और कविताएं प्रस्तुत कीं, जिन्हें श्रोताओं ने खूब सराहा।

जनोदय पंच। सेंधवा। सेंधवा हायर सेकेंडरी स्कूल के पास स्थित अर्श स्टूडियो में साहित्यिक संस्था सेंधवा काव्य मंच एवं बज़्में अदब के सदस्यों द्वारा साहित्यिक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित श्रोताओं ने शायरी और कविताओं का लुत्फ लिया।

            कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षक मनोज मराठे ‘मन’ ने की। संचालन शायर वाजिद हुसैन साहिल द्वारा किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजपुर के शायर रिज़वान अली रहे, जिन्होंने नाते पाक पढ़कर गोष्ठी का शुभारंभ किया।

शायरों ने सुनाया अपना कलाम

शाकिर शेख शाकिर ने अपने रूमानी अशआर,
“कुछ इस तरह भी अदाएं दिखानी पड़ती है, गिरा के चेहरे पे ज़ुल्फें उठानी पड़ती है।” सुनाकर दाद बटोरी।

हाफ़िज़ अहमद हाफ़िज़ ने ग़ज़ल,
“कमी वालिद की देखो करने पूरी, बड़े भाई को देखा जा रहा है।”
प्रस्तुत कर परिवार में बड़े भाई की जिम्मेदारी और महत्व को शब्द दिए।

विशाल त्रिवेदी आदिल ने ग़ज़ल,
“नहीं है ख़ौफ़ मुझे अब किसी भी तूफ़ाँ का, दुआएँ माँ की बहुत हैं मुझे बचाने को…” सुनाकर माहौल बनाया।

वाजिद हुसैन साहिल ने ग़ज़ल,
“अदब में भी सियासत हो रही है, तभी तो ऐसी हालत हो रही है…” के माध्यम से साहित्यिक कार्यक्रमों में हो रही राजनीति पर तंज़ और अफसोस जाहिर किया।

रिज़वान अली और अध्यक्षीय समापन

राजपुर से आए शायर रिज़वान अली ने अपना कलाम,
“किसी को ज़िन्दगानी में यहाँ सब कुछ नहीं मिलता…”
सुनाकर तालियां बटोरी।

गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे मनोज मराठे ‘मन’ ने शेर—
“बाज़ार में सच्चाई का सिक्का चला दिया…”
और
“सब मेरे हो गए जब मैंने गले से लगा लिया…”
सुनाकर गोष्ठी का समापन किया।

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