चार मासूमों बच्चीयों के सिर पर नहीं था मां-बाप का साया, समर्पण सेवा संस्था ने दिखाई नई राह

अंजड। हर बच्चा सपने देखने का हकदार है, हमारा कर्तव्य है कि हम उन्हें वह मौका दें। मासूमियत बेसहारा हो जाए तो समाज का कर्तव्य है उसे सहारा देना। अंजड थाना क्षेत्र से एक मार्मिक घटना सामने आई है। यहां चार मासूम बच्चीयां कुछ महीनों से अपनी मां के छोड़कर जाने और पिता की शराब पिने की आदत से बेसहारा हो गए थे। चारों बच्चे पूरी तरह अकेले रह गए थे। चारों बच्चीयां नतो पढ़ाई करते थे और नहीं आंगनवाड़ी केन्द्र जाते थे। वहीं इधर उधर से खाना मांगकर बड़ी बहन अपनी छोटी बहनों का पालन-पोषण करती थी। इसके अलावा दो बच्चीयों के सिर में गंभीर घाव होने पर अपना इलाज तक नहीं करवा पा रही थी।
अंजड की समर्पण संस्था को मामले से लोगों ने करवाया अवगत
इस दुखद स्थिति की जानकारी मिलते ही समाज सेवा के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही समर्पण सेवा संस्था ने तुरंत संज्ञान लिया और एक सामाजिक जिम्मेदारी निभाई। सर्वप्रथम दोनों बच्चियों का इलाज संस्था के माध्यम से शुरू करवाया गया ओर सभी बच्चीयों को खाने-पीने की आवश्यकता पुरी कर संस्था के सतीश परिहार ने चाइल्ड लाइन 1098 से संपर्क कर बच्चों की स्थिति साझा की और मदद की गुहार लगाई। लेकिन जवाबदारों द्वारा पहले उदासिनता दिखाने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और एक बार फिर मामला उनके संज्ञान में लाने पर प्रशासन द्वारा मामले की पुष्टि करने के बाद सभी चारों बालिकाओं को औपचारिक प्रक्रिया के तहत राजकीय बाल आश्रम भेज दिया गया, जहां अब वे सुरक्षित वातावरण में रहकर अपनी पढ़ाई और जीवन को नई दिशा दे सकेंगे। वहीं हायर सेंटर में एक बच्चे का इलाज भी करवाया जाएगा। बच्चीयों के पिता मजदुरी का काम करता है । ऐसे हालात में इन मासूमों के लिए समर्पण संस्था की यह पहल इन बच्चों जीवन में नई आशा की किरण बनकर आई है।

दरअसल अंजड थाना क्षेत्र के एक गांव के लोगों के द्वारा इन बच्चियों के बारे में पता चला। तुरंत संस्था के सदस्य इन बच्चियों को मिलने उनके स्थान पर गए तथा उनके खाने-पीने व रहने की व्यवस्था के बारे में आसपास के लोगों से बातचीत की। साथ ही बच्चों को आश्वासन दिया की उनकी जो भी ज़रूरतें हैं, वह संस्था के द्वारा पूरी करवाई जाएंगी। इसके अलावा प्रशासन से भी सहयोग की अपील की जाएगी।
प्रशासन की पहल पर मिला बाल आश्रम में स्थान३..
प्रशासनिक समिति ने बच्चीयों से बातचीत की और उनकी स्थिति का मूल्यांकन किया। इसके बाद आधिकारिक प्रक्रिया के तहत इन बालिकाओं को बाल आश्रम भेजा गया, जहां अब ये सुरक्षित वातावरण में रहकर अपनी शिक्षा जारी रख सकेंगे और जीवन को एक नई दिशा दे सकेंगे।

जरूरतमंदों के लिए मदद का जज्बा–
अंजड की समर्पण सेवा संस्था समाज सेवा में लगातार सक्रिय है। अब तक सैकड़ों जरूरतमंदों के जीवन में बदलाव ला चुकी है। इसी क्रम में संस्था द्वारा 3 देहदान करवाने सहित 15 नेत्रदान व 31 लावारिस अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार कर लगभग 30 से अधिक मानसिक रोगियों का पुनर्वास करवाया जा चुका है।
इस कार्य में संस्था के सतीश परिहार, डाक्टर पुष्पेंद्र अछाले, डाक्टर संजय परमार, देवेन्द्र यादव, गिरीश चौहान, अजरूद्दीन मंसुरी,राजू प्रजापत आदि का योगदान रहा है।
निसंदेह, संस्था द्वारा समाज के कमजोर वर्ग के लिए किए जा रहे प्रयास बेहद सराहनीय हैं। सभी को ऐसे कार्यों में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी, ताकि ये वर्ग भी आत्मनिर्भर बन सकें और समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें।



