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INDORE NEWS इंदौर में जहरीले पानी का मामला: आयुक्त हटे, दो वरिष्ठ अधिकारी सस्पेंड

दूषित जल आपूर्ति से जुड़ी मौतों के मामले में सरकार की कार्रवाई, जांच रिपोर्ट में खतरनाक बैक्टीरिया की पुष्टि

इंदौर शहर में दूषित जल आपूर्ति से हुई मौतों के मामले ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। नगर निगम स्तर पर कार्रवाई, हाईकोर्ट में रिपोर्ट और जल गुणवत्ता जांच के निष्कर्षों ने पूरे प्रकरण को गंभीर बना दिया है।

इंदौर में दूषित पानी से मौतों के सामने आने के बाद राज्य सरकार ने नगर निगम स्तर पर कड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार को नगर निगम कमिश्नर दिलीप यादव को पद से हटा दिया गया। इसके साथ ही आईएएस क्षितिज सिंघल को इंदौर नगर निगम का नया आयुक्त नियुक्त किया गया। इसी कार्रवाई के तहत एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव को सस्पेंड कर दिया गया। यह निर्णय जल आपूर्ति व्यवस्था में सामने आई गंभीर लापरवाही के बाद लिया गया है।

हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट

सरकार ने शुक्रवार को हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में कहा गया कि दूषित पानी से चार मौतें हुई हैं। यह रिपोर्ट ऐसे समय में पेश की गई, जब मृतकों के परिजन और अस्पतालों के माध्यम से 15 मौतों की जानकारी सामने आ चुकी है। इस मामले में अगली सुनवाई 6 जनवरी को निर्धारित की गई है। इससे पहले 1 जनवरी को हाईकोर्ट ने सरकार को स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।

मौतों का विवरण और जांच निष्कर्ष

39 पेज की स्टेटस रिपोर्ट में बताया गया कि जिन लोगों की मौत हुई, उनकी उम्र 60 वर्ष से अधिक थी। रिपोर्ट के अनुसार उर्मिला की मृत्यु 28 दिसंबर को हुई, तारा (60) और नंदा (70) की 30 दिसंबर को तथा हीरालाल (65) की मृत्यु 31 दिसंबर को दर्ज की गई। वहीं, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हसानी के अनुसार एमजीएम मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट में पानी को पीने योग्य नहीं पाया गया। सैंपलों में फीकल कॉलिफॉर्म, ई-कोलाई, विब्रियो और प्रोटोजोआ जैसे बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है।

नगर निगम में नई नियुक्तियां

प्रकरण के बीच इंदौर नगर निगम में प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए तीन नई नियुक्तियां की गई हैं। खरगोन जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आकाश सिंह, आलीराजपुर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रखर सिंह और इंदौर उप परिवहन आयुक्त आशीष कुमार पाठक को निगम में अपर आयुक्त बनाया गया है। नगर निगम की प्रयोगशाला में भेजे गए लगभग 80 सैंपलों को भी जांच में असंतोषजनक बताया गया है। भागीरथपुरा क्षेत्र से लिए गए सैंपल का पानी पीने और घरेलू उपयोग के योग्य नहीं पाया गया, हालांकि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।


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