मुंबई: एक माह पहले मिली गुलशन कुमार हत्या की टिप, चेतावनी के बाद भी नहीं बच सकी जान, राकेश मारिया ने साझा किया पूरा घटनाक्रम
पुलिस ऑफिसर राकेश मारिया ने बताया—एक माह पहले मुखबिर से मिली थी हत्या की साजिश की जानकारी, महेश भट्ट को फोन कर दी थी चेतावनी।

मुंबई में 1997 में हुई गुलशन कुमार हत्या मामले पर एक पुराना खुलासा सामने आया है। एक पुलिस अधिकारी को एक माह पहले ही हत्या की साजिश की जानकारी मिल चुकी थी। चेतावनी देने और सुरक्षा मिलने के बावजूद गुलशन कुमार की शिव मंदिर के बाहर हत्या हो गई।
मुंबई में 12 अगस्त 1997 को टी-सीरीज के फाउंडर गुलशन कुमार की शिव मंदिर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। लंबे समय बाद पुलिस ऑफिसर राकेश मारिया ने बताया कि इस घटना से एक माह पहले ही उन्हें मुखबिर से हत्या की साजिश की टिप मिल गई थी और उन्होंने इसके बाद महेश भट्ट को फोन कर चेतावनी दी थी कि गुलशन कुमार घर से न निकलें।
“गुलशन कुमार का विकेट जाने वाला है” — देर रात आया कॉल
राकेश मारिया ने राज शमाणि के पॉडकास्ट में कहा कि 22 अप्रैल 1996 की देर रात उन्हें लैंडलाइन पर कॉल आया। कॉल करने वाले ने कहा, “सर, गुलशन कुमार का विकेट जाने वाला है।” पूछने पर बताया गया कि “अबू सलीम ये करवाने वाला है। वो शिव मंदिर जाता है, और जैसे ही बाहर निकलेगा, उसे मार देंगे।” इस सूचना के बाद उन्होंने कहा कि अगर कुछ और पता चले तो बताना।
महेश भट्ट को फोन कर दी गई थी तत्काल चेतावनी
राकेश मारिया ने बताया कि अगली सुबह लगभग 6:30-7 बजे उन्होंने महेश भट्ट को फोन कर पूछा कि क्या वे गुलशन कुमार को जानते हैं। महेश भट्ट ने कहा कि वे उनके लिए फिल्म डायरेक्ट कर रहे हैं। इसके बाद राकेश मारिया ने कहा कि उन्हें घर से बाहर न निकलने को कहें और शिव मंदिर जाने से रोकें। उन्होंने कहा कि क्राइम ब्रांच से सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी।
सुरक्षा दी गई, लेकिन एक माह बाद हुआ हमला
कुछ देर बाद महेश भट्ट ने वापस फोन कर बताया कि गुलशन कुमार रोज शिव मंदिर जाते हैं। राकेश मारिया ने दोबारा कहा कि उन्हें बाहर न निकलने दें। उन्होंने यह जानकारी क्राइम ब्रांच को दी, जिसके बाद गुलशन कुमार को सुरक्षा दी गई। लेकिन अगस्त में उनकी शिव मंदिर के बाहर हत्या कर दी गई।
सुरक्षा ढीली पड़ी, बिना गार्ड के गए थे मंदिर
राकेश मारिया के अनुसार गुलशन कुमार मुंबई पुलिस की सुरक्षा में थे, जबकि उनकी फैक्ट्री नोएडा में थी, जहां वे यूपी पुलिस की सुरक्षा में रहते थे। समय बीतने के साथ खतरे को हल्का मान लिया गया और सुस्ती आ गई। बताया गया कि किसी त्योहार पर उनके बॉडीगार्ड छुट्टी पर चले गए थे, और गुलशन कुमार भी बिना सुरक्षा के मंदिर पहुंच गए, जहां उनकी हत्या कर दी गई।



