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सेंधवा में केंद्रीय जांच एजेंसी की दबिश, 13 करोड़ के नाबार्ड लोन मामले में तायल बंधुओं के ठिकानों पर जांच

सेंधवा। बुधवार सुबह केंद्रीय जांच एजेंसी की टीम ने सेंधवा में तायल बंधुओं के विभिन्न ठिकानों पर दबिश दी। यह कार्रवाई नाबार्ड से लिए गए करीब 13 करोड़ रुपये के ऋण से जुड़े मामले में दर्ज एफआईआर के बाद की गई। बताया जा रहा है कि केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई द्वारा दबिश दी गई है। हालांकि
हालांकि, जांच से जुड़े अधिकारियों ने अभी तक मीडिया से इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार सीबीआई की टीम ने सेंधवा स्थित पुराना एबी रोड, झंवर कॉलोनी और एक अन्य स्थान पर जांच शुरू की है। मामला एग्रो क्लस्टर परियोजना के नाम पर लिए गए ऋण के कथित दुरुपयोग से जुड़ा बताया जा रहा है।

एग्रो क्लस्टर के नाम पर लिया गया था 13.99 करोड़ का लोन

सीबीआई कोलकाता की आर्थिक अपराध शाखा ने नाबार्ड बैंक भोपाल के साथ कथित धोखाधड़ी के मामले में एफआईआर दर्ज की है। यह शिकायत नाबार्ड भोपाल के डीजीएम नंदू जे. नायक द्वारा की गई थी। एफआईआर में सेंधवा के निमाड़ एग्रो पार्क के संचालक अर्पित कुमार तायल, निकुंज तायल, अशोक कुमार तायल और अंकित कुमार तायल को आरोपी बनाया गया है।

सीबीआई की एफआईआर के अनुसार वर्ष 2019 में ग्राम जानली में एग्रो प्रोसेसिंग क्लस्टर स्थापित करने के लिए नाबार्ड से 13.99 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत कराया गया था। परियोजना की कुल लागत 31 करोड़ रुपये से अधिक दर्शाई गई थी, जिसमें फूड प्रोसेसिंग मंत्रालय से 10 करोड़ रुपये की सहायता प्रस्तावित थी।

फर्जी समझौते और राशि के अन्यत्र उपयोग का आरोप

प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि बुनियादी ढांचा विकसित करने के बजाय आरोपियों ने अपनी ही अन्य कंपनियों के साथ कथित तौर पर फर्जी समझौते किए। वर्ष 2020 और 2021 के दौरान पांच किस्तों में जारी की गई ऋण राशि को परियोजना में उपयोग करने के स्थान पर अन्य बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया।

2024 में एनपीए घोषित हुआ खाता

सीबीआई के अनुसार समय-सीमा बढ़ाने के नाम पर बैंक अधिकारियों को गुमराह किया गया। परियोजना पूरी नहीं होने पर 29 सितंबर 2024 को संबंधित ऋण खाता एनपीए घोषित कर दिया गया। ऑडिट के बाद नाबार्ड द्वारा सीबीआई को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया था।

इन धाराओं में एफआईआर दर्ज

जांच में नाबार्ड को करीब 12.99 करोड़ रुपये की मूल राशि और लगभग 44 लाख रुपये ब्याज का नुकसान सामने आया है। सीबीआई ने आरोपियों और अज्ञात सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 409, 467, 468 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7(सी) के तहत एफआईआर दर्ज की है।

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