पानसेमल; अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन कर रहे किसानों ने सीखे योग के गुर। किसान हमारा अन्न दाता है और उसकी अनेको समस्याये होती हैं।

पानसेमल; किसान नहीं तो स्वास्थ्य नहीं, किसी भी मौसम में अपनी परवाह ना कर कड़ी कर दूसरों के लिए जीने वाला किसान भी अनेकों समस्याओं से जूझ रहा है। पहले किसान गोबर खाद, प्राकृतिक बीजों से खेती करता था। तो लोग शक्ति वान, ऊर्जा वान होते थे। तो रोग,शोक, दुःख ना लोगों के पास आते थे,ना किसानों के पास।सभी संतुष्ट और स्वस्थ जीवन जीते थे। उक्त बातें योग गुरु कृष्ण कांत सोनी ने आंदोलन रत किसानों को निशुल्क योग शिविर में कहीं। योग गुरु ने आगे बताया कि प्रकृति पर निर्भरता, सिंचाई की कमी, छोटी-छोटी और खंडित जोते,फसल का उचित मूल्य ना मिलना,ऋण की अनुपलब्धता, भण्डारण और परिवहन कि कमी, इसके अलावा जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाएं, और बिचौलियों द्वारा शोषण, पारंपरिक तरीकों का उपयोग जैसी समस्याएं भी उन्हें घेरती हैं।ऐसी स्थिति में मानसिक संतुलन बनाए रखना बड़ा कठिन होता है। अतः योग प्राणायाम का अभ्यास कर मानसिक संतुलन बनाकर उनकी समस्याओं एवं रोगो का निदान हो सकता है। अप्राकृतिक वातावरण में मस्तिष्क के लिए ध्यान आसन, फेफड़ों की मजबूती के लिए भस्त्रिका प्राणायाम, सम्पूर्ण शरीर में दर्द मिटाने के लिए विट्ठल आसन, शरीर एवं पीट कि समस्याओं के लिए पट्टा आसन करे, दिनभर का तनाव दूर करने के लिए हास्य सन करे। योग गुरु ने अनेकों योग के गुर सिखाए और निशुल्क उपकरण एवं औषधि उपलब्ध की। इस अवसर पर किसान विक्रम अछालिया,निलेश चौहान, महेश चौहान,मयूर चौहान, भूपेंद्र खेडकर,डेमसिग ब्रामहणे, काकड़ा सेमल, अर्जुन मोरे,शेरसिग पाडवी,मणडाराम सोलंकी, मुकेश अहरिया, गोविंद भंडारी,जितू भंडारी आदि किसान उपस्थित थे। फ़ोटो योग शिक्षा ग्रहण करते हुए किसान।



