इंदौर में ऑपरेशन मैट्रिक्स के तहत म्यूल अकाउंट गिरोह का पर्दाफाश, सात गिरफ्तार और एक फरार
पुलिस के मुताबिक करोड़ों के बैंक ट्रांजेक्शन और करीब 200 साइबर फ्रॉड मामलों से जुड़े खातों का खुलासा

जनोदय पंच। इंदौर में साइबर ठगी के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन मैट्रिक्स के तहत एरोड्रम थाना पुलिस ने म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस के मुताबिक बैंक खातों में करोड़ों रुपए के ट्रांजेक्शन मिले हैं और करीब 200 साइबर फ्रॉड मामले सामने आए हैं।
एक लाख 44 हजार की ठगी की जांच से खुला नेटवर्क
एरोड्रम थाने में एक लाख 44 हजार रुपए की साइबर ठगी की FIR दर्ज हुई थी। जांच के दौरान ठगी की रकम जिन बैंक खातों में पहुंची, उनमें सूरज जेसवाल और अमन चौहान के खाते सामने आए। बैंक डिटेल और KYC की जांच में सूरज जेसवाल के खाते में करीब 3 करोड़ 42 लाख रुपए और अमन चौहान के खाते में करीब साढ़े 17 लाख रुपए का ट्रांजेक्शन मिला।
पूछताछ में गिरोह का खुलासा
पुलिस ने सूरज जेसवाल को गिरफ्तार कर पूछताछ की। पुलिस के मुताबिक पूछताछ में संगठित गिरोह का खुलासा हुआ। इसके बाद MIG क्षेत्र में दबिश देकर अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक गिरोह का मास्टरमाइंड हर्ष है, जो अलग-अलग लोगों से चार से पांच हजार रुपए में बैंक खाते किराए पर लेता था।
खातों के साथ ATM, चेकबुक और सिम का इस्तेमाल
पुलिस के मुताबिक किराए पर लिए गए बैंक खातों की चेकबुक, ATM कार्ड और सिम का इस्तेमाल साइबर ठगी के लिए किया जाता था। गिरफ्तार आरोपियों में सूरज जेसवाल, हर्ष, संदीप उर्फ सौरभ, उमन उर्फ पवन, हरिओम और आयुष शामिल हैं। अमन चौहान फरार बताया गया है।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से अलग-अलग बैंकों के 34 ATM/डेबिट कार्ड, 12 पासबुक, 24 चेकबुक, एक वाई-फाई राउटर, 8 मोबाइल फोन, 1 लाख 8 हजार रुपए नकद और एक डायरी जब्त की है।
देशभर में करीब 200 FIR की जानकारी
पुलिस के मुताबिक इन खातों के खिलाफ देशभर में करीब 200 FIR दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि करोड़ों रुपए की रकम किन राज्यों और किन लोगों से आई और आगे कहां ट्रांसफर हुई। पूरे नेटवर्क के पीछे कौन-कौन से मास्टरमाइंड हैं, इसकी भी जांच की जा रही है।
मामले में संगठित अपराध की धारा 112 BNS भी बढ़ाई गई है। पुलिस बैंक कर्मचारियों की भूमिका और बैंकिंग सिस्टम में हुए करोड़ों रुपए के ट्रांजेक्शन की भी जांच करेगी। पुलिस के मुताबिक यह केवल बैंक खाते उपलब्ध कराने वाला नेटवर्क नहीं, बल्कि साइबर ठगी के लिए म्यूल अकाउंट तैयार करने वाला संगठित गिरोह है। आरोपियों से पूछताछ जारी है।


