बड़वानी: बड़वा के स्पर्श से चल पड़ते हैं कई टन वजनी गाड़े, संत खांडेराव महाराज और फखरुद्दीन बाबा की स्मृति में अनूठी आस्था परंपरा
4 मार्च 2026 को गोधूलि बेला में नवलपुरा, ठीकरी और अंजड़ में होगा आयोजन, सामाजिक समरसता का संदेश

जनोदय पंच। बड़वानी में धुलेंडी का पर्व 4 मार्च 2026 को 831 वर्ष पुरानी गाड़ा खिंचाई परंपरा के साथ मनाया जाएगा। संत खांडेराव महाराज और फखरुद्दीन बाबा की स्मृति में आयोजित यह आयोजन नवलपुरा, ठीकरी और अंजड़ में होगा, जहां बड़वा के स्पर्श से गाड़े चलने की मान्यता है।
परंपरा का ऐतिहासिक आधार
जिले में धुलेंडी केवल रंगों का पर्व नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा का प्रतीक बन चुका है। विक्रम संवत 1252 से चली आ रही गाड़ा खिंचाई परंपरा संत संत खांडेराव महाराज और फखरुद्दीन बाबा की स्मृति में निभाई जाती है। स्थानीय मान्यता के अनुसार संत खांडेराव महाराज और उनके मित्र पीर मोईनुद्दीन चिश्ती ने भाईचारे और गांव की उन्नति का संदेश देते हुए इस परंपरा की शुरुआत की थी। तब से यादव परिवार के बड़वा इसे निभाते आ रहे हैं।

नवलपुरा में विशेष आयोजन
बड़वानी शहर के नवलपुरा क्षेत्र में इस वर्ष 20वां आयोजन होगा। 14-15 गाड़ों को एक साथ बांधकर हल्दी-कुंकू से सजाया जाएगा। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में पूजन करेंगी। बड़वा राकेश यादव “खांडेराव-खांडेराव” के जयघोष के बीच गाड़ों को स्पर्श करेंगे। कई टन वजनी गाड़े आगे बढ़ते नजर आएंगे। मार्ग पर रंगोली, गुलाल और श्रद्धालुओं की भीड़ विशेष दृश्य प्रस्तुत करेगी।

ठीकरी और अंजड़ में परंपरा
ठीकरी में एक दिन पूर्व मंदिर से गाड़ों को मैदान में लाया जाएगा। गोधूलि बेला में बड़वा के कंधा लगाते ही गाड़े चल पड़ेंगे। प्रशासन द्वारा सुरक्षा और व्यवस्था के इंतजाम किए जा रहे हैं। अंजड़ में बस स्टैंड से भोंगली नदी पुलिया तक सात गाड़े खींचे जाएंगे। पूजन-अर्चन के बाद बड़वा के स्पर्श के साथ जयघोष के बीच गाड़े आगे बढ़ेंगे।



