मिर्च की उन्नत खेती के लिए तकनीकी सलाह- किसान अपनाएं वैज्ञानिक पद्धति

बड़वानी; जिले के किसानों की आय बढ़ाने और मिर्च की फसल को कीट-रोगों से बचाने के उद्देश्य से कृषि एवं उद्यानिकी विभाग द्वारा मंगलवार आयोजित कार्यशाला में विस्तृत जानकारी दी गयी है। मिर्च की खेती में स्थान चयन से लेकर भंडारण तक की वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर किसान बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।
मिर्च मूलतः एक उपोष्णकटिबंधीय फसल है, जिसके लिए गर्म और आर्द्र जलवायु सबसे उपयुक्त होती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, काली मिट्टी मिर्च के लिए सर्वाेत्तम मानी गई है। जलभराव वाली मिट्टी में खेती से बचना चाहिए, क्योंकि इससे फसल खराब होने का खतरा रहता है। स्थान चयन के समय मिट्टी की गुणवत्ता, जल निकासी और सिंचाई के स्रोतों का आकलन अवश्य करें।
बीज उपचार और नर्सरी प्रबंधन
बेहतर अंकुरण के लिए बीज उपचार अनिवार्य है।
ऽ बीज उपचार- ट्राइकोडर्मा (4 ग्राम/किग्रा) या स्यूडोमोनास (10 ग्राम/किग्रा) से बीजों का उपचार करें। ऽ नर्सरी- नर्सरी के लिए ऊँची क्यारियाँ बनाएँ और नीम की खली का उपयोग करें। हाइब्रिड पौधों के लिए कोकोपीट ट्रे का उपयोग अधिक प्रभावी रहता है।
बुवाई एवं पोषण प्रबंधन
-समय- बुवाई के लिए जुलाई-अगस्त और रोपाई के लिए अगस्त-सितंबर का समय अनुकूल है।
– दूरी- पौधों के बीच सही दूरी बनाए रखें और जैविक खाद को प्राथमिकता दें।
– पोषण- मृदा परीक्षण के आधार पर ही उर्वरकों का उपयोग करें। नीम की खली 250 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से डालें।
कीट एवं रोग नियंत्रण
मिर्च की फसल में थ्रिप्स, माइट्स और फल छेदक का प्रकोप अधिक होता है। इसके बचाव के लिए-
– खेत के चारों ओर मक्का या ज्वार की 3-4 कतारें श्गार्ड क्रॉप के रूप में लगाएँ।
– फेरोमोन ट्रैप (10 प्रति एकड़) और पक्षियों के बैठने के लिए खूँटियाँ लगाएँ।
– रोग नियंत्रण के लिए जैविक फफूंदनाशकों और आवश्यकतानुसार विशेषज्ञों द्वारा अनुशंसित कीटनाशकों (जैसे स्पिनोसैड या फिप्रोनिल) का छिड़काव करें।
कटाई और भंडारण
फसल की कटाई सही समय पर साफ उपकरणों से करें। सुखाने के दौरान नमी को 60-85 प्रतिशत से घटाकर 8-12 प्रतिशत तक लाएँ। भंडारण के लिए साफ, सूखी जगह और 4-7 डिग्री सेल्सियस तापमान आदर्श रहता है। नई बोरियों का ही उपयोग करें ताकि संक्रमण न फैले। किसानों से अपील की है कि वे रसायनों का सीमित प्रयोग करें और समेकित कीट प्रबंधन व समेकित पोषक तत्व प्रबंधन को अपनाकर अपनी खेती को लाभप्रद बनाएँ।



