सेंधवा; भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर “मेरा गांव मेरी जिम्मेदारी यात्रा” का शुभारंभ, ग्रामीण संवाद और जनजागरण के लिए पोरलाल खर्ते ने शुरू की विशेष जागरूकता यात्रा

सेंधवा; भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर पूर्व राज्य कर अधिकारी और पूर्व लोकसभा प्रत्याशी पोरलाल खर्ते ने “मेरा गांव मेरी जिम्मेदारी यात्रा” का शुभारंभ किया। यह यात्रा खरगोन जिले की भगवानपुरा विधानसभा में स्थित बिजागढ़ वाले बाबा के शिव मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ प्रारंभ होगी और खरगोन–बड़वानी लोकसभा क्षेत्र के गांव-गांव में पहुंचकर जनसंवाद करेगी।
यात्रा का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण समाज की वास्तविक समस्याओं को नज़दीक से समझना, उन पर चर्चा करना और समाधान के लिए जनजागरण करना है। इस दौरान विशेष रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पानी, किसान, मजदूर, महिला, रोजगार, पलायन, नशामुक्ति, पर्यावरण, संवैधानिक अधिकार और ग्रामस्वराज जैसे विषयों पर फोकस किया जाएगा। यात्रा गांव-गांव में संवाद कर स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप व्यवहारिक सुझाव एकत्र करेगी। पहले चरण में सेंधवा और पानसेमल विधानसभा क्षेत्र के गांव शामिल किए गए हैं।
यात्रा का कोई निर्धारित रूट नहीं होगा
यात्रा का कोई निर्धारित रूट नहीं होगा। जहां भी गांव के प्रमुख कार्यकर्ताओं द्वारा संवाद का निवेदन किया जाएगा, वहां पहुंचकर शाम के समय नुक्कड़ सभाएं आयोजित की जाएंगी। ग्रामीणों, बुजुर्गों, युवाओं, किसानों और महिलाओं से सीधा संवाद कर गांव के मुद्दों का मैदानी आकलन किया जाएगा। पहला पड़ाव सेंधवा के बलखड़ गांव में रखा गया है, जहां 15 नवंबर 2025 को शाम 7 बजे भगवान बिरसा मुंडा जयंती मनाई जाएगी और यात्रा के उद्देश्य पर विस्तार से चर्चा होगी।
खर्ते ने बताया कि यह पहल किसी राजनीतिक अभियान का हिस्सा नहीं है, बल्कि सामाजिक जागरूकता और जनभागीदारी को बढ़ावा देने वाला दीर्घकालिक कार्यक्रम है, जो वर्ष 2027 तक चलेगा। यात्रा के दौरान सामने आने वाले मुद्दों को संकलित कर समय आने पर भोपाल में उचित स्तर पर प्रस्तुत किया जाएगा।
गांव मजबूत होगा तो देश मजबूत होगा
यह यात्रा भगवान बिरसा मुंडा के जल-जंगल-जमीन और आदिवासी अधिकार, महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज, विनोबा भावे के भूमि दान और सामाजिक समरसता, तथा डॉ. भीमराव अंबेडकर के समान अधिकार, न्याय और संविधान के विचारों से प्रेरित है। इन महान व्यक्तित्वों की सोच का सार “गांव मजबूत होगा तो देश मजबूत होगा” संदेश को आगे बढ़ाता है।
पोरलाल खर्ते ने कहा कि लोकतंत्र का सही अर्थ तभी सार्थक होता है जब गांव का प्रत्येक व्यक्ति निर्णय प्रक्रिया में अपनी भागीदारी महसूस करे। यह यात्रा ग्रामीणों की भावनाओं और समस्याओं को समझने और उनकी आवाज़ को उचित स्तर तक पहुंचाने की निरंतर पहल है। उन्होंने सभी ग्रामवासियों, युवाओं, किसानों, मजदूरों और महिलाओं से इस यात्रा को सहयोग देने की अपील की, ताकि गांव को स्वावलंबी, सुशासित, स्वच्छ और खुशहाल बनाया जा सके।



