106 करोड़ की सड़क 6 महीने में गड्ढों में तब्दील, हाईकोर्ट ने मांगी रिपोर्ट, राष्ट्रीय राजमार्ग-3 पर हादसों की गूंज, इंदौर खंडपीठ ने केंद्र सरकार से जवाब तलब किया, सामाजिक कार्यकर्ता जैन की याचिका पर कार्रवाई
गुणवत्ता पर उठे सवालों के बीच हाईकोर्ट ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल को 15 दिसंबर तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

सेंधवा के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-3 पर बने बाकानेर घाट के वैकल्पिक मार्ग की बदहाल स्थिति पर हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। 106 करोड़ की लागत से बनी 8.8 किमी सड़क मात्र छह माह में गड्ढों में तब्दील हो गई, जिस पर न्यायालय ने केंद्र सरकार से रिपोर्ट मांगी है।
सेंधवा क्षेत्र में इंदौर-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग-3 पर दुर्घटनाओं के मद्देनजर बाकानेर घाट के पास 106 करोड़ रुपये की लागत से 8.8 किलोमीटर का वैकल्पिक मार्ग बनाया गया था। जून 2023 में शुरू होकर नवंबर 2024 में खुली यह सड़क मात्र छह महीने में गड्ढों में बदल गई। बरसात के दौरान मामूली छह इंच बारिश में ही सड़क की परतें उखड़ गईं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
हाईकोर्ट में जनहित याचिका पर सुनवाई
इस मामले में सेंधवा के सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता बी.एल. जैन द्वारा दायर जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति बिनोद कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने सुनवाई की। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अभिषेक तुगनावत ने न्यायालय को बताया कि वर्ष 2009 से अब तक इस क्षेत्र में 3,000 से अधिक दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 450 से अधिक लोगों की मौत और कई गंभीर रूप से घायल हुए।
तकनीकी खामी बनी हादसों की वजह
याचिका में बताया गया कि राष्ट्रीय राजमार्ग के भेरूघाट और बाकानेर घाट के हिस्से में निर्माण के दौरान तकनीकी खामी के चलते सड़क की ढलान 6 मीटर रखी गई, जिससे वाहनों के ब्रेक फेल होने की घटनाएं बढ़ीं। वैकल्पिक मार्ग बनाने के बावजूद निर्माण में गुणवत्ता नहीं रखी गई और सड़क कुछ ही महीनों में खराब हो गई।
हाईकोर्ट का निर्देश
हादसों और खराब निर्माण गुणवत्ता को देखते हुए न्यायालय ने केंद्र सरकार की ओर से पैरवी कर रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुनील जैन को निर्देश दिए हैं कि इस मामले में उपयुक्त कार्रवाई की जाए और 15 दिसंबर तक रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।



