सेंधवा। दो साल से निर्मित संजीवनी क्लिनिक का नहीं हुआ शुभारंभ, कलेक्टर से शिकायत

सेंधवा। दो साल से निर्मित संजीवनी क्लिनिक का शुभारंभ नहीं होने पर दावल बेड़ी की निवासी व महिलाओं ने वार्ड पार्षद को रोक कर संजीवनी क्लिनिक को शुरू की मांग की पार्षद गणेश राठौड़ ने जन सुनवाई में जिला कलेक्टर को पत्र के माध्यम से संजीवनी क्लिनिक खोलने की दरकार की ।
मप्र शासन द्वारा नगर में दो स्थानों पर संजीवनी क्लिनिक का निर्माण कराया गया था। जिसके अंतर्गत अयोध्या बस्ती दावल बेड़ी पर भी संजीवनी क्लिनिक का निर्माण हुए दो वर्ष से अधिक समय हो गया किंतु इसका लाभ बस्ती वालों अभी तक नहीं मिलने पर बेड़ी के निवासी व महिलाओं ने वार्ड पार्षद गणेश राठौड़ को रोक कर क्लिनिक को चालू करने की मांग की । राठौड़ ने जन सुनवाई में आई जिला कलेक्टर को पत्र के माध्यम से संजीवनी क्लिनिक की वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए इसे शुरू करने की मांग की नपा वार्ड 12 के पार्षद गणेश राठौड़ ने बताया कि सेंधवा नगर में मप्र सरकार द्वारा 25- 25 लाख की लागत से दो संजीवनी क्लिनिक खोलने हेतु राशि नपा को निर्माण हेतु सौंपी गई थी नपा द्वारा वार्ड 23 टैगोल बेड़ी व वार्ड 12 में दावल बड़ी जिसे सरकार द्वारा अयोध्या बस्ती का दर्जा दिया गया था का निर्माण कराया गया । जिसमें वार्ड 23 टैगोल बेड़ी पर संजीवनी क्लिनिक का संचालन प्रारंभ कर दिया गया । वहां की बस्ती के लोग संजीवनी क्लिनिक का लाभ ले रहे हैं । किंतु वार्ड 12 दावल बड़ी पर संजीवनी क्लिनिक का निर्माण हुए करीबन दो वर्ष हो गए किंतु इसका संचालन प्रारंभ नहीं किया गया । कुछ समय तक तो यह बहाना बनाया गया कि संजीवनी क्लिनिक के सामने विद्युत विभाग की डीपी लगी हुईं है । कोई भी दुर्घटना घटित हो सकती है उसे हटाए जाने के बाद ही संजीवनी क्लिनिक का शुभारंभ किया जाएगा । इसके लिए नपा द्वारा विद्युत विभाग से डीपी हटाने की कार्यवाही कर डीपी को अन्य स्थान पर स्थापित कर देने के बाबजूद एक साल से अधिक समय गुजर जाने के बाद भी क्लिनिक प्रारंभ नहीं किया गया। इसके लिए बार बार बीएमओ, व जिला चिकित्सालय को लिखित व मौखिक आवेदन किया गया । किंतु कोई संतोषपद जवाब नहीं मिला । राठौड़ ने बताया कि उक्त वार्ड में मजदूर वर्ग, पिछड़ा वर्ग, व आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोग निवास करते हैं। जो मेहनत मजदूरी कर अपनी आजीविका चलाते हैं जिनकी आय सीमित है । इसे में छोटी मोटी बीमारी के लिए भी उन्हें सिविल अस्पताल जाना पड़ता है जो दावल बेड़ी से दाई किलो मीटर दूरी पर स्थित है । इतनी दूरी से पैदल चल कर जाना बीमार व्यक्ति के लिए मुश्किल भरा होता है । या फिर रिक्शे से जाने आने पर 100 रुपए खर्च करना पड़ता हैं प्राइवेट डॉ को दिखाने में फीस ही 200 रुपए लग जाती हैं जो मजदूर वर्ग के लिए आर्थिक बोझ बढ़ जाता है । इसके लेकर ही सरकार ने संजीवनी क्लिनिक खोलने का निर्णय लिया गया था । किंतु पैसा खर्च करने के बाद भी संजीवनी क्लिनिक का लाभ नहीं मिल पा रहा है । इस संबंध में पूर्व में जिला चिकित्सक अधिकारी से चर्चा करने पर उन्होंने कहा कि संजीवनी क्लिनिक खोलने मेरे हाथ में नहीं हैं। इसके बाद राठौड़ ने उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला को भी पत्र देकर दावल बेड़ी पर शीघ्र संजीवनी क्लिनिक चालू कराने की मांग की थी । तब उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला से भी चर्चा की । शुल्का ने कहा कि इस मामले को दिखवाता हु । सरकार ने पैसा खर्च कर बिल्डिंग तो बना दिया किंतु क्लिनिक शुरू नहीं हुआ और नहीं सुविधाएं । इसके साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा जो दावल बेड़ी पर पूर्व में दी जा रही थी वह भी बंद कर दी गई है । लोग परेशान हो रहे है ।



