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सेंधवा में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन गोपाल कृष्ण महाराज ने धर्म, समाजहित और पारिवारिक मूल्यों पर दिए संदेश

कृषि उपज मंडी किला परिसर में कथा के दौरान भगवान कृष्ण के जीवन, प्रह्लाद प्रसंग और बेटियों के महत्व पर प्रवचन

जनोदय पंच। सेंधवा के कृषि उपज मंडी किला परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा वाचक परम पूज्य गुरु गोपाल कृष्ण महाराज (उज्जैन) ने धर्म, समाजहित, भगवान कृष्ण के जीवन, पारिवारिक मूल्यों, बेटियों के महत्व तथा प्रह्लाद-हिरण्यकश्यप प्रसंग पर श्रद्धालुओं को संबोधित किया।

सेंधवा के कृषि उपज मंडी किला परिसर स्थित मंडी शेड में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा वाचक परम पूज्य गुरु गोपाल कृष्ण महाराज (उज्जैन) ने कहा कि एक भक्त भगवान से अपनी पीड़ा दूर करने की प्रार्थना करता है। इस पर भगवान उससे पूछते हैं कि कथा के दौरान वह कितनी बार उपस्थित हुआ। भक्त के व्यस्त रहने की बात कहने पर भगवान भी स्वयं के व्यस्त होने का संदेश देते हैं। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने धार्मिक आयोजनों में सहभागिता का महत्व बताया।

समाजहित और धर्म पालन का संदेश

प्रवचन के दौरान गोपाल कृष्ण महाराज ने कहा कि व्यक्ति का रंग, जन्म का समय अथवा जन्म स्थान महत्वपूर्ण नहीं होता, बल्कि उसके जीवन के कार्य महत्व रखते हैं। उन्होंने कहा कि समाजहित और राष्ट्रहित में किए गए कार्य व्यक्ति को लंबे समय तक स्मरणीय बनाते हैं। भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि धर्म और समाज पर संकट आने पर भगवान कृष्ण ने धर्म का साथ दिया। उन्होंने कहा कि धर्म का पालन करते समय अपने और पराए का भेद नहीं करना चाहिए।

बेटियों के महत्व पर रखे विचार

कथा के दौरान गोपाल कृष्ण महाराज ने परिवार में बेटियों की भूमिका पर भी विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि बेटियां विवाह के बाद भी अपने माता-पिता का ध्यान रखती हैं और उनके सुख-दुख की चिंता करती हैं। उन्होंने बेटियों को परिवार का सम्मान बताते हुए कहा कि परिवार में उनका विशेष स्थान होता है। उन्होंने इस प्रसंग के माध्यम से पारिवारिक संबंधों और जिम्मेदारियों का उल्लेख किया।

प्रह्लाद और हिरण्यकश्यप प्रसंग का वर्णन

प्रवचन में गोपाल कृष्ण महाराज ने हिरण्यकश्यप, कायडू, प्रह्लाद तथा भगवान ब्रह्मा से जुड़े प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि हिरण्यकश्यप तपस्या के लिए चला गया, जबकि कायडू ने गर्भावस्था में भागवत कथा का श्रवण किया, जिससे गर्भस्थ प्रह्लाद ने भी कथा सुनी। इसके बाद हिरण्यकश्यप द्वारा भगवान ब्रह्मा से वरदान प्राप्त करने और स्वयं को भगवान घोषित करने के प्रसंग का भी विस्तार से वर्णन किया। कथा का आयोजन सत्यनारायण मंदिर महिला मंडल द्वारा किया जा रहा है।

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