सेंधवा में गुरु पूर्णिमा पर महर्षि सांदीपनि गुरु पर्व, विद्यार्थियों को निष्काम कर्म और ज्ञान का मिला संदेश
पूर्व प्राध्यापक डॉ. के.आर. शर्मा ने सांदीपनि आश्रम की परंपरा और निष्काम कर्म का महत्व बताया, विद्यार्थियों ने गुरु सम्मान का लिया संकल्प।

जनोदय पंच। वीर बलिदानी खाज्या नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सेंधवा में गुरु पूर्णिमा उत्सव महर्षि सांदीपनि गुरु पर्व के रूप में उत्साहपूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम में गुरु-शिष्य परंपरा, निष्काम कर्म, ज्ञान के महत्व और गुरुओं के प्रति श्रद्धा का संदेश दिया गया।
महर्षि सांदीपनि गुरु पर्व के रूप में हुआ आयोजन
सेंधवा के वीर बलिदानी खाज्या नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में बुधवार को गुरु पूर्णिमा उत्सव महर्षि सांदीपनि गुरु पर्व के रूप में बड़े उत्साह और सम्मान के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती एवं महर्षि सांदीपनि के चित्र पर माल्यार्पण तथा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। भारतीय ज्ञान परंपरा द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में पूर्व प्राध्यापक डॉ. के.आर. शर्मा मुख्य अतिथि वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।

सांदीपनि आश्रम, निष्काम कर्म और ज्ञान का महत्व बताया
मुख्य अतिथि डॉ. के.आर. शर्मा ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में सांदीपनि आश्रम, उज्जैन का उल्लेख करते हुए कहा कि यह महाकाल की नगरी में स्थित है। उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण ने सांदीपनि आश्रम में शिक्षा ग्रहण की और उसी ज्ञान के आधार पर महाभारत युद्ध को प्रलय से सृजन की दिशा में ले जाने का मार्ग प्रशस्त हुआ। उन्होंने कहा कि कर्म करना मनुष्य का अधिकार है, लेकिन परिणाम की चिंता नहीं करनी चाहिए। परिणाम का चिंतन कर्म के प्रयास को आधा कर देता है।

उन्होंने गुरु पूर्णिमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व आषाढ़ मास अर्थात वर्षा ऋतु में आता है, जब अज्ञान रूपी अंधकार को ज्ञान रूपी प्रकाश से दूर करने की आवश्यकता होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से श्रद्धा और विश्वास के साथ निरंतर कर्म करते रहने का आह्वान करते हुए कहा कि इससे वे निश्चित रूप से अपने लक्ष्य तक पहुंचेंगे।
प्राचार्य और प्राध्यापकों ने गुरु-शिष्य परंपरा का महत्व बताया
प्राचार्य डॉ. जी.एस. वास्कले ने गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि महाविद्यालय में प्रत्येक विषय के प्राध्यापक उपलब्ध हैं और विद्यार्थियों को अपने विषय का ज्ञान उनसे प्राप्त करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ज्ञान जहां से भी मिले, उसे ग्रहण कर जीवन को सुंदर और सफल बनाया जा सकता है।
प्रो. मीतु मोतियानी ने कहा कि माता-पिता जीवन के प्रथम गुरु होते हैं। विद्यार्थियों को संकल्प लेना चाहिए कि वे कभी भी उनके आत्मसम्मान को ठेस नहीं पहुंचाएंगे। उन्होंने कहा कि राम एवं कृष्ण अवतारी पुरुष थे, फिर भी उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा का निर्वहन कर समाज के सामने आदर्श प्रस्तुत किया।
विद्यार्थी प्रकाश सोलंकी ने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों की अज्ञानता दूर करने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं और यह विद्यार्थियों का सौभाग्य है कि उन्हें उनका मार्गदर्शन प्राप्त होता है। आवश्यकता केवल उस ज्ञान को ग्रहण कर जीवन में उतारने की है। विद्यार्थी आकाश चौहान ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
गुरुओं के नाम पर किया गया पौधारोपण
कार्यक्रम का संचालन डॉ. मनोज तारे ने किया। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा गुरुओं के प्रति श्रद्धा, समर्पण और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है तथा गुरुओं के प्रति सम्मान बनाए रखना हमारा कर्तव्य और सौभाग्य है। कार्यक्रम का आभार कार्यक्रम प्रभारी डॉ. जितेश्वर खरते ने माना।
इस अवसर पर डॉ. एम.एल. अवाया, डॉ. संतरा चौहान, डॉ. महेश बाविस्कर, प्रो. बी.एस. जमरे सहित महाविद्यालय के प्राध्यापक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के पश्चात राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी प्रो. सायसिंह अवास्या के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने अपने-अपने गुरुओं के नाम पर पौधारोपण किया।



