बड़वाह। गुरु पूर्णिमा पर निर्मल विद्यापीठ स्कूल की अनूठी पहल..गुरुओं को भेंट किए गए 101 नीम के पौधे…

कपिल वर्मा बड़वाह। गुरु पूर्णिमा महोत्सव के पावन अवसर पर निर्मल विद्यापीठ में गुरु सम्मान एवं पर्यावरण संरक्षण को समर्पित एक अभिनव पहल की गई। विद्यालय के समस्त शैक्षणिक कर्मचारियों को 101 नीम के पौधे वितरित किए गए तथा प्रत्येक शिक्षक ने संकल्प लिया कि वे इन पौधों को अपने घर अथवा उपयुक्त स्थान पर रोपित कर उनका जीवनपर्यंत संरक्षण एवं संवर्धन करेंगे।
विद्यालय की इस पहल का उद्देश्य गुरु के आदर्शों को प्रकृति संरक्षण से जोड़ते हुए समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश देना रहा।
इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य श्री आशीष झा ने अपने उद्बोधन में गुरु की तुलना नीम के वृक्ष से करते हुए कहा कि “नीम स्वाद में भले ही कड़वा प्रतीत होता है, किन्तु उसका प्रत्येक अंश—जड़, तना, छाल, पत्तियाँ, फल एवं रस—मानव जीवन के लिए औषधि एवं कल्याणकारी होता है। ठीक उसी प्रकार एक गुरु भी अपने अनुशासन, तप, ज्ञान और संस्कारों से समाज को स्वस्थ दिशा प्रदान करता है।
गुरु का सम्पूर्ण जीवन स्वयं के लिए नहीं, बल्कि शिष्यों एवं समाज के उज्ज्वल भविष्य के लिए समर्पित होता है।”
उन्होंने आगे कहा कि जिस प्रकार एक नीम का वृक्ष वर्षों तक अनगिनत लोगों को छाया, प्राणवायु और औषधि प्रदान करता है, उसी प्रकार एक शिक्षक भी पीढ़ियों का निर्माण कर राष्ट्र के भविष्य को सशक्त बनाता है। इसलिए प्रत्येक शिक्षक स्वयं एक जीवंत प्रेरणा है।
प्राचार्य श्री झा ने विद्यार्थियों को गुरु पूर्णिमा के महत्व से अवगत कराते हुए महर्षि वेदव्यास के जीवन एवं भारतीय ज्ञान परंपरा में उनके अप्रतिम योगदान का उल्लेख किया तथा विद्यार्थियों से गुरु के प्रति श्रद्धा, अनुशासन, सेवा और ज्ञान के प्रति समर्पण का भाव विकसित करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों द्वारा गुरु वंदना, गुरु भजन, वैदिक श्लोकों का सस्वर पाठ, प्रेरक भाषण एवं रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं। विशेष रूप से आचार्य द्रोणाचार्य एवं एकलव्य के जीवन पर आधारित नाट्य प्रस्तुति ने उपस्थित सभी को भावविभोर कर दिया। प्रस्तुति के माध्यम से गुरु-शिष्य संबंधों की मर्यादा, समर्पण, त्याग और अटूट निष्ठा का प्रेरणादायी संदेश दिया गया।
विद्यालय के निदेशक प्रतीक जैन ने समस्त गुरुजनों को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि गुरु ही वह शक्ति हैं जो सामान्य बालक को संस्कारवान, शिक्षित एवं जिम्मेदार नागरिक बनाते हैं।
उन्होंने विद्यालय परिवार के सभी शिक्षकों के समर्पण, निष्ठा एवं राष्ट्र निर्माण में उनके अमूल्य योगदान की सराहना करते हुए उन्हें साधुवाद दिया। गुरु सम्मान, भारतीय संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के अद्भुत समन्वय से परिपूर्ण यह आयोजन विद्यालय की विशिष्ट पहचान बन गया।
उपस्थित अभिभावकों एवं विद्यार्थियों ने विद्यालय की इस अभिनव पहल की मुक्तकंठ से सराहना की तथा इसे समाज के लिए प्रेरणास्पद बताया।



