सेंधवा में संत नामदेव महाराज की 676वीं पुण्यतिथि पर 53 प्रतिभाओं का सम्मान, शिक्षा और समाजसेवा को मिला प्रोत्साहन
मेधावी विद्यार्थियों, प्रतियोगिता विजेताओं, वरिष्ठ महिलाओं, डॉक्टरों और समाज की विशिष्ट प्रतिभाओं को किया गया सम्मानित

सेंधवा; शहर में संत शिरोमणि नामदेव महाराज की 676वीं पुण्यतिथि पर क्षत्रिय अहिर शिंपी समाज ने प्रतिभा, शिक्षा और समाजसेवा को प्रोत्साहित करने की अनूठी पहल की। दो दिनी आयोजन में समाज की तीन पीढ़ियों को एक मंच पर सम्मानित किया। कक्षा 5वीं, 8वीं, 10वीं और 12वीं में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले 24 मेधावी विद्यार्थियों, मेहंदी, रंगोली व चित्रकला प्रतियोगिता के 18 विजेताओं व समाज की 11 वरिष्ठ महिलाओं सहित 53 प्रतिभाओं का सम्मान किया। समाज के दो पीएचडी धारक, दो डॉक्टर और गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने वाली महिला प्रतिभा को भी सम्मानित किया।

कार्यक्रम में शिक्षा को बढ़ावा देने के साथ संत नामदेव के विचारों को जीवन में उतारने और समाज को नशामुक्त बनाने का संकल्प भी लिया। दूसरे दिन सोमवार को हुए मुख्य कार्यक्रम में मुख्य अतिथि नपाध्यक्ष बसंतीबाई यादव, अध्यक्षता कर रहे गायत्री धाम सेंधवा के पंडित मेवालाल पाटीदार, मीरा पाटीदार व समाज के पूर्व अध्यक्ष कृष्णकांत नेरपगारे ने संत नामदेव महाराज के चित्र का पूजन-अर्चन व दीप प्रज्वलित किया। समाज अध्यक्ष राजेश निकुम, महिला अध्यक्ष मृणाली खेरनार, प्रतिभा कापुरे सहित समाज के पदाधिकारी सहित समाजजन मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. संजीव निकुम ने किया और आभार उपाध्यक्ष बापूराव कापरा ने व्यक्त किया। शाम 5 बजे मोतिबाग स्थित महाराष्ट्र मंदिर से संत नामदेव महाराज की झांकी और रथ के साथ शोभायात्रा निकाली गई। यह विभिन्न मार्गों से होते हुए पुनः मंदिर पहुंची। कार्यक्रम में समाज भवन में सहभोज और रात में कढ़ी-खिचड़ी प्रसाद का वितरण किया। आयोजन में शहर के साथ धनोरा, बलवाड़ी सहित आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए। दो दिनी आयोजन में समाज के युवाओं और महिलाओं ने विशेष भूमिका निभाई।

सुई जोड़ती है, कैंची काटती है… इसलिए सुई को जेब में रखते हैं
पं. पाटीदार ने समाजजनों को नशामुक्त रहने का संकल्प दिलाया। उन्होंने सुई और कैंची का उदाहरण देते हुए कहा कि सुई का काम जोड़ना है, इसलिए उसे दर्जी उसे जेब में सम्मान के साथ रखते है। जबकि कैंची काटने का काम करती है, इसलिए उसे नीचे रखा जाता है। समाज में भी व्यक्ति को जोड़ने वाला बनना चाहिए, तोड़ने वाला नहीं। संत नामदेव के जीवन से जुड़े कुत्ते और घी की रोटी के प्रसंग के माध्यम से करुणा और जीवों के प्रति प्रेम का संदेश दिया।

पीएचडी, डॉक्टर और विश्व रिकॉर्ड वाली प्रतिभा सम्मानित
समाज की उपलब्धियों को मंच पर सम्मान मिला। पीएचडी की उपाधि प्राप्त करने वाले डॉ. संजीव निकुम और डॉ. हरीश खेरनार, डाॅक्टर बनी बेटी डॉ. निमषा निकुम और डॉ. नंदिनी चौहान को सम्मानित किया। वहीं भारतीय जीवन बीमा निगम में कार्य करते हुए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराने वाली संगीता निकुम को भी शील्ड, प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इसके साथ पूर्व अध्यक्ष कृष्णकांत नेरपगारे व प्रतिभा कापुरे को समाज में उत्कृष्ट कार्य के लिए अभिनंदन पत्र दिया।

24 विद्यार्थियों को स्मृति भेंट, 11800 रुपए की प्रोत्साहन राशि
शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 5वीं, 8वीं, 10वीं और 12वीं में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले 24 विद्यार्थियों को सम्मानित किया। समाज के प्रमोद निकुम ने अपने पिता रतिलाल निकुम की स्मृति में विद्यार्थियों को संत नामदेव महाराज का चित्र भेंट किए। पीथमपुर के चंद्रकांत भांडारकर ने मां लक्ष्मीबाई भांडारकर की स्मृति में 11800 रुपए की प्रोत्साहन राशि दी। मेहंदी, रंगोली और चित्रकला प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले 18 प्रतिभागियों को भी प्रशस्ति पत्र और शील्ड देकर सम्मानित किया।


समाज की 11 वरिष्ठ महिलाओं को दिया सम्मान
समाज की वरिष्ठ महिला समाजजनों में सुमन नेरपगारे, बेबी निकुम, कुमुदिनी भांडारकर, विमल निकुम, लीला निकुंभ, विमल सोनवणे, निंबाबाई निकुम, अन्नपूर्णा बिरारी, निर्मला इशी, रेणु जाधव और विमल पवार का शाल-श्रीफल भेंटकर उनका सम्मान किया।




