गायत्री धाम सेंधवा में साधकों का अनूठा साधना-अनुष्ठान, दो दिन मौन अज्ञातवास में रहेंगे साधक, निराहार रहकर करेंगे आत्मसाधना
5 राज्यों से पहुँचे भाई-बहन; तप, त्याग और आत्मअनुशासन का अद्भुत संगम

सेंधवा। आध्यात्मिक साधना, आत्मअनुशासन और अंतर्मुखी चेतना का अनूठा दृश्य इन दिनों गायत्री धाम, सेंधवा में देखने को मिल रहा है। देश के विभिन्न क्षेत्रों से 5 राज्यों के साधक भाई-बहन विशेष साधना-अनुष्ठान के लिए गायत्री धाम पहुँचे हैं। साधकों द्वारा आगामी दो दिनों तक मौन अज्ञातवास एवं निराहार साधना की जाएगी।
इस विशेष साधना का उद्देश्य बाहरी संसार से कुछ समय के लिए स्वयं को अलग कर मन, विचार और चेतना को भीतर की ओर केंद्रित करना है। साधक इन दो दिनों में मौन रहकर आत्मचिंतन, ध्यान, जप एवं साधना के माध्यम से अपने अंतर्मन को निर्मल एवं सशक्त बनाने का प्रयास करेंगे।
मौन बनेगा साधना का माध्यम
साधना के दौरान साधक अनावश्यक बातचीत एवं बाहरी गतिविधियों से स्वयं को दूर रखते हुए मौन का पालन करेंगे। माना जाता है कि मौन केवल बोलना बंद करना नहीं, बल्कि मन के अनावश्यक विचारों को शांत कर स्वयं के भीतर उतरने का माध्यम है।
अज्ञातवास की इस साधना में साधक अपने नियमित सामाजिक व्यवहार से अलग रहकर आत्मनिरीक्षण करेंगे। मोबाइल, मनोरंजन एवं बाहरी संपर्कों से दूरी बनाकर साधना के वातावरण में रहना इस अनुष्ठान की विशेषता रहेगी।

निराहार रहकर साधना और आत्मसंयम का अभ्यास
इस दो दिवसीय साधना में साधक निराहार रहकर आत्मसंयम एवं तप का अभ्यास करेंगे। इसका उद्देश्य शरीर को कष्ट देना नहीं, बल्कि इच्छाओं पर नियंत्रण, संकल्प शक्ति का विकास और साधना के प्रति एकाग्रता बढ़ाना है। साधक अपनी क्षमता एवं निर्धारित साधना-विधि के अनुरूप इस तप-अनुष्ठान में सहभागी बन रहे हैं।

5 राज्यों से पहुँचे साधक
गायत्री धाम सेंधवा में आयोजित इस विशेष साधना में 5 राज्यों से भाई-बहनों का आगमन हुआ है। अलग-अलग स्थानों से आए साधक एक ही उद्देश्य के साथ यहाँ एकत्रित हुए हैं—आत्मपरिष्कार, साधना और युग निर्माण के लिए स्वयं को अधिक समर्थ बनाना।
गायत्री धाम का शांत एवं आध्यात्मिक वातावरण साधकों के लिए इस विशेष साधना को और अधिक प्रभावी बना रहा है। प्रातःकालीन साधना से लेकर ध्यान, जप, स्वाध्याय और आत्मचिंतन तक विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से साधक अपने भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने का प्रयास करेंगे।

‘बाहर की दुनिया से दूरी, भीतर की यात्रा’
इस अनूठे अज्ञातवास का मूल भाव है—कुछ समय के लिए बाहरी दुनिया से दूरी और स्वयं के भीतर की यात्रा। आज के भागदौड़ भरे जीवन में जब व्यक्ति लगातार मोबाइल, सोशल मीडिया, काम और विभिन्न प्रकार के तनावों से घिरा रहता है, ऐसे समय में मौन, एकांत और साधना का यह प्रयोग आत्मचिंतन का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।
गायत्री परिवार से जुड़े साधकों का मानना है कि व्यक्ति के विचारों में परिवर्तन से ही उसके व्यवहार में परिवर्तन आता है और व्यक्ति के परिवर्तन से परिवार, समाज एवं राष्ट्र में सकारात्मक परिवर्तन की शुरुआत होती है।

साधना से आत्मपरिष्कार और समाज निर्माण का संकल्प
दो दिवसीय मौन अज्ञातवास केवल व्यक्तिगत साधना तक सीमित नहीं है। साधक इस साधना के माध्यम से अपने जीवन में संयम, अनुशासन, सेवा, सद्भाव और सकारात्मक चिंतन को और अधिक मजबूत करने का संकल्प ले रहे हैं।

गायत्री धाम सेंधवा में 5 राज्यों से आए साधकों की यह साधना ‘ आत्मा निर्माण से राष्ट्र निर्माण ’ के उद्देश्य को सार्थक करती दिखाई दे रही है। दो दिनों तक चलने वाला यह आध्यात्मिक प्रयोग साधकों के लिए आत्मशोधन, आत्ममंथन और आत्मनिर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।



