सेंधवा में गोभक्तों की विशाल रैली, गोमाता को राष्ट्रमाता दर्जा और गोवंश हत्या पर सख्त कानून की मांग तेज, वरला में भी सौंपा गया ज्ञापन
गोसंरक्षण और केंद्रीय कानून लागू करने की मांग को लेकर सेंधवा और वरला में व्यापक जनसमर्थन

जनोदय पंच।सेंधवा में गोमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने, गोवंश हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध और सशक्त केंद्रीय कानून लागू करने की मांग को लेकर रैली निकाली गई। गोभक्तों ने तहसीलदार राहुल सोलंकी को ज्ञापन सौंपते हुए हस्ताक्षर युक्त संकल्प पत्र भी प्रस्तुत किए।
सेंधवा में गोमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने, गोवंश हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और गोसेवा के लिए सशक्त केंद्रीय कानून लागू करने की मांग को लेकर सोमवार को रैली निकाली गई। इस “गोसम्मान आह्वान अभियान” के तहत गोभक्तों ने तहसीलदार राहुल सोलंकी को ज्ञापन सौंपा। रैली की शुरुआत किला परिसर स्थित राजराजेश्वर मंदिर गायत्री शक्ति पीठ से हुई, जिसमें बैलगाड़ी और गाय माता के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। रैली राम बाजार, श्याम बाजार, मोतीबाग चौक और जलाराम मंदिर होते हुए एसडीएम कार्यालय पहुंची।
ज्ञापन सौंपा, हस्ताक्षर अभियान भी चला
एसडीएम कार्यालय में राष्ट्रपति के नाम तहसीलदार राहुल सोलंकी को ज्ञापन सौंपा गया। अधिकारियों को हस्ताक्षर युक्त संकल्प पत्र भी दिए गए। अभियान की तैयारी के तहत रविवार को व्यापक हस्ताक्षर अभियान चलाया गया, जिसमें 16 हजार से अधिक परिवारों से संपर्क कर 50 हजार से ज्यादा लोगों के हस्ताक्षर लिए गए।
प्रमुख मांगें और जागरूकता अभियान
गोसेवकों ने बताया कि अभियान का उद्देश्य समाज में गोसंरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और सरकार तक जनभावनाओं को पहुंचाना है। प्रमुख मांगों में गोमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा, गोवंश हत्या पर सख्त प्रतिबंध, प्रभावी केंद्रीय कानून लागू करना और गोचर बोर्ड का गठन शामिल है। रैली के दौरान गोसंरक्षण, गो आधारित कृषि प्रणाली और गोचर भूमि संरक्षण के महत्व पर भी लोगों को जागरूक किया गया।
वरला में भी सौंपा गया ज्ञापन
वरला में “गो सम्मान आह्वान अभियान” के अंतर्गत गोभक्तों, संत समाज और नागरिकों ने तहसीलदार के माध्यम से “महामहिम राष्ट्रपति, माननीय प्रधानमंत्री, मध्य प्रदेश के राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री महोदय” को सात पृष्ठों का मांग पत्र सौंपा। ज्ञापन में भारतीय संविधान के “अनुच्छेद 48 और 51 (ह)” का हवाला देते हुए गोवंश को “राष्ट्रमाता” का दर्जा, वध और तस्करी को “संज्ञेय एवं गैर-जमानती अपराध” घोषित करने, “केंद्रीय गोसेवा मंत्रालय” के गठन, गो आधारित कृषि प्रोत्साहन, नंदीशाला और गो अभयारण्य निर्माण, गोवाहिनी एम्बुलेंस और ट्रॉमा सेंटर स्थापना, तथा “गो-विज्ञान” को शिक्षा में शामिल करने जैसी मांगें रखी गईं।
भविष्य की रूपरेखा घोषित
अभियान प्रतिनिधियों ने बताया कि आंदोलन सात्विक और अहिंसक रहेगा। जुलाई से अक्टूबर 2026 तक जिला और राज्य स्तर पर स्मृति निवेदन, फरवरी 2027 में दिल्ली में शांतिपूर्ण संकीर्तन और अगस्त 2027 से मांगें पूरी नहीं होने पर क्रमिक उपवास शुरू किया जाएगा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गोभक्त, सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक मौजूद रहे।



