इंदौर शिक्षा विभाग में 2.86 करोड़ गबन, भृत्य सिद्धार्थ जोशी गिरफ्तार, परिवार खातों में पहुंची बड़ी रकम
एमजी रोड पुलिस की कार्रवाई, पत्नी-बेटी के खातों में 1.75 करोड़ जमा, कई अधिकारियों की भूमिका जांच में

जनोदय पंच। इंदौर शिक्षा विभाग में 2.86 करोड़ रुपये के गबन मामले में भृत्य सिद्धार्थ जोशी को गिरफ्तार किया गया। आरोपी ने पत्नी और बेटी के खातों में 1.75 करोड़ जमा किए। 13 आरोपियों पर केस दर्ज, 33 खातों में राशि ट्रांसफर होने का खुलासा हुआ।
गबन का खुलासा और गिरफ्तारी
इंदौर के स्कूली शिक्षा विभाग के विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में 2.86 करोड़ रुपये के गबन मामले में एमजी रोड पुलिस ने भृत्य सिद्धार्थ जोशी को गिरफ्तार किया है। आरोपी शाउमावि खजराना में पदस्थ था। जांच में सामने आया कि उसने सरकारी राशि का दुरुपयोग कर अपने परिवार के खातों में बड़ी रकम जमा की।
13 आरोपियों पर मामला दर्ज
पुलिस के मुताबिक इस प्रकरण में अतिथि शिक्षक सहित कुल 13 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पांच मुख्य आरोपितों में सिद्धार्थ जोशी, मोहन दांगी, पवन खामोद, छोटेलाल गौड और केदारनारायण दीक्षित शामिल हैं। इन आरोपितों द्वारा आठ सह आरोपितों के 33 बैंक खातों में दो करोड़ से अधिक राशि ट्रांसफर कर गबन किया गया।
परिवार और अन्य खातों में ट्रांसफर
जांच में पाया गया कि सिद्धार्थ जोशी ने पत्नी रेणु और बेटी मोहक जोशी के खातों में 1.75 करोड़ रुपये जमा किए। इसके अलावा हेमलता, रोशन पानेरी, मुकेश दांगी, अनीता दांगी, जगदीश और मुकेश राठौर के खातों में भी राशि ट्रांसफर की गई। कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर एफआईआर दर्ज की गई है।
अधिकारियों की भूमिका भी जांच में
गबन 2018 से लगातार छात्रवृत्ति, जीपीएफ और अन्य मद की राशि में किया जा रहा था, जिसका खुलासा भोपाल में ऑडिट के दौरान हुआ। इस अवधि में इंदौर विकासखंड कार्यालय में पदस्थ रहे तत्कालीन बीईओ सहित अन्य अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
फोकस कीवर्ड: इंदौर गबन मामला, सिद्धार्थ जोशी, शिक्षा विभाग घोटाला, एमजी रोड पुलिस, 2.86 करोड़ गबन
कंप्यूटर ऑपरेटर के पास थे लॉगिन अधिकार,
जांच में यह तथ्य सामने आया है कि भृत्य सिद्धार्थ जोशी को कंप्यूटर ऑपरेटर का कार्य भी सौंपा गया था। उसे लॉगिन आईडी और पासवर्ड उपलब्ध कराए गए थे, जिनका उपयोग वित्तीय लेन-देन में किया गया।
मामले में जिन अधिकारियों के नाम सामने आए हैं, उनमें तत्कालीन बीईओ हीरालाल खुशाल, ओपी वर्मा और महेश खोटे शामिल बताए जा रहे हैं। फिलहाल पूरे प्रकरण में जांच और पुलिस कार्रवाई जारी है।



