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जबलपुर में नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़े पर हाईकोर्ट सख्त, सीबीआई और काउंसिलों से विस्तृत रिपोर्ट तलब

सीबीआई, इंडियन नर्सिंग काउंसिल और एमपी नर्सिंग काउंसिल को अगली सुनवाई से पहले हलफनामा पेश करने के निर्देश

जनोदय पंच। जबलपुर में नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़े को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने सीबीआई, इंडियन नर्सिंग काउंसिल और मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल से विस्तृत हलफनामा और प्रगति रिपोर्ट तलब की है।

हाईकोर्ट का सख्त रुख, रिपोर्ट पेश करने के निर्देश

जबलपुर में लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई, इंडियन नर्सिंग काउंसिल और मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल को अगली सुनवाई से पहले विस्तृत हलफनामा और प्रगति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए। सीबीआई को निर्देशित किया गया कि वह अगली सुनवाई तक जांच में सामने आए व्यक्तियों और संस्थानों की संलिप्तता स्पष्ट करे और दोषियों के खिलाफ अब तक की गई दंडात्मक कार्रवाई की जानकारी भी प्रस्तुत करे।

मान्यता देने वाले अधिकारियों पर जवाबदेही तय करने के निर्देश

इंडियन नर्सिंग काउंसिल और मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल को विशेष रूप से उन अधिकारियों के खिलाफ उठाए गए कदमों की जानकारी देने को कहा गया, जो समय-समय पर अनुपयुक्त और मानक विहीन कॉलेजों को मान्यता देने के लिए जिम्मेदार रहे। संबंधित प्रतिवादियों को एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए गए, जिसमें उन प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाइयों का स्पष्ट विवरण हो, जो ऐसे कॉलेजों को अवैध रूप से संचालित होने देने वाले अधिकारियों पर की गई हैं।

जांच में सैकड़ों कॉलेजों में भारी अनियमितताएं उजागर

जनहित याचिका में वर्ष 2020-21 में खुले सैकड़ों फर्जी नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद सीबीआई जांच में लगभग 800 नर्सिंग कॉलेजों में से करीब 600 कॉलेज अनुपयुक्त या कमियों से भरे पाए गए। इन संस्थानों में भवन, लैब, लाइब्रेरी, अनुभवी शिक्षक और 100 बिस्तरों वाले अस्पताल जैसी अनिवार्य सुविधाओं की भारी कमी पाई गई। कई कॉलेज केवल कागजों पर संचालित पाए गए और कई प्रिंसिपल व शिक्षक एक साथ 15-15 कॉलेजों में कार्यरत दर्शाए गए।

परीक्षा और ट्रांसफर को लेकर विवाद, अगली सुनवाई 12 मई

याचिकाकर्ता एसोसिएशन ने आवेदन में आरोप लगाया कि 117 अपात्र नर्सिंग कॉलेजों के छात्रों को उपयुक्त संस्थानों में स्थानांतरित करने के बजाय उनकी अंतिम वर्ष की परीक्षाएं ली जा रही हैं। वहीं मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल ने परीक्षाओं और परिणामों की घोषणा की अनुमति मांगी। हाईकोर्ट ने दोनों आवेदन लंबित रखते हुए स्पष्ट किया कि नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता करने वाले किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति या संस्था को बख्शा नहीं जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 12 मई को निर्धारित की गई है।

 

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