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बड़वानी। डॉक्टरों ने बचाया जुड़वा बच्चों और मां का जीवन 10वीं गर्भावस्था और जटिल प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा सुरक्षित

जनोदय पंच। बड़वानी। जिला चिकित्सालय बड़वानी में स्त्री रोग विशेषज्ञों और चिकित्सा टीम की तत्परता से एक बेहद जटिल प्रसव को सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया। ग्राम कंड्रावन तहसील पाटी निवासी 38 वर्षीय पिंटी पति नवान, जो अपनी 10वीं गर्भावस्था और जुड़वा बच्चों के साथ उच्च रक्तचाप व गंभीर सिरदर्द से जूझ रही थीं, उन्हें और उनके दोनों नवजात शिशुओं को सुरक्षित बचा लिया गया है।

मरीज पिंटी को 02 मई 2026 को सुबह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सीएचसी पाटी में भर्ती किया गया था। वहां सुबह 11ः05 बजे पहली बालिका (वजन 2 किलो) का सामान्य प्रसव हुआ। चूंकि मामला जुड़वा बच्चों का था और मां को उच्च रक्तचाप के कारण दौरे (झटके) आने का खतरा था, इसलिए उन्हें एहतियातन इंजेक्शन डहेव4 दिया गया। दूसरे बच्चे के प्रसव में जटिलता को देखते हुए सीएचसी पाटी के बीएमओ ने तत्काल जिला चिकित्सालय बड़वानी को सूचित किया और मरीज को सुबह 11ः50 बजे रेफर कर दिया।

दोपहर 02ः15 बजे जिला चिकित्सालय पहुँचते ही पूर्व सूचना के आधार पर स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रतिभा अवास्या, लेडी मेडिकल ऑफिसर डॉ. श्रेया महाजन और नर्सिंग स्टाफ पूरी तैयारी के साथ लेबर रूम में मुस्तैद थे। दूसरा बच्चा प्लेसेंटा के पीछे था और कंपाउंड प्रेजेंटेशन जटिल स्थिति में था। मरीज को अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा था।

डॉ. प्रतिभा अवास्या ने कुशलतापूर्वक अस्सिटेड ब्रीच प्रक्रिया के माध्यम से दूसरे बालक वजन 2.2 किलो का सुरक्षित सामान्य प्रसव कराया। प्रसव के तुरंत बाद रक्तस्राव रोकने के लिए प्रभावी प्रबंधन किया गया और मां को एचडीयू हाई डिपेंडेंसी यूनिट में शिफ्ट किया गया। जांच के दौरान पिंटी का हीमोग्लोबिन 9.0 ग्राम और प्लेटलेट्स 85 हजार पाए गए थे। अस्पताल द्वारा उन्हें तत्काल निःशुल्क एक यूनिट ब्लड और एक यूनिट प्लेटलेट्स चढ़ाया । 03 मई को मां और दोनों जुड़वा बच्चे पूर्णतः स्वस्थ हैं। पिंटी का हीमोग्लोबिन 8.5 ग्राम और प्लेटलेट्स बढ़कर 94 हजार हो गए हैं। सिकल सेल जांच भी नेगेटिव आई है।

उल्लेखनीय है कि पिंटी की यह 10वीं डिलीवरी थी। उनके पूर्व में 8 बेटियां और एक बेटा (डेढ़ वर्ष) हैं, जो सभी स्वस्थ हैं। खास बात यह है कि उनकी पहली डिलीवरी सीएचसी पाटी में हुई थी। इस बार संस्थागत प्रसव के तहत समय पर अस्पताल पहुँचने और जिला चिकित्सालय की त्वरित प्रतिक्रिया ने एक बड़े जोखिम को टाल दिया।

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